Trending

‘जब दुनिया दीवारें खड़ी कर रही है, तब भारत बना रहा है साझेदारी के पुल’: वैश्विक संरक्षणवाद पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का दोटूक संदेश

सरिता त्रिपाठी | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: वर्तमान में जब दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक अनिश्चितताओं से घबराकर आयात शुल्क (Tariffs) बढ़ा रही हैं और संरक्षणवादी (Protectionist) नीतियां अपनाते हुए अपने बाजारों के इर्द-गिर्द दीवारें खड़ी कर रही हैं, तब भारत ने पूरी दुनिया के सामने एक खुला, पारदर्शी और साझेदारी-आधारित मॉडल पेश किया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए वैश्विक व्यापार के वर्तमान परिदृश्य पर यह अत्यंत बेबाक और महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य ‘आत्मनिर्भर’ बनना है, लेकिन इसका अर्थ दुनिया से कटना नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक मजबूत, विश्वसनीय और लचीला साझीदार बनना है।

पीयूष गोयल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, यूरोपीय संघ के कार्बन टैक्स (CBAM) और लाल सागर में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक व्यापार (Global Trade) बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई देश अपनी सीमाओं को सील कर रहे हैं और ‘नियर-शोरिंग’ (Near-Shoring) या ‘फ्रेंड-शोरिंग’ पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इन सबके विपरीत, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, और वर्तमान में यूके, ओमान और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत के उन्नत चरण में है।

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत की कूटनीति और व्यापार नीति दोनों ही ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (विश्व एक परिवार है) के सिद्धांत पर आधारित हैं। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत अब केवल असेंबलिंग का केंद्र नहीं है, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण (Zero Defect, Zero Effect) का वैश्विक हब बन रहा है। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा उपकरण और ऑटोमोबाइल के निर्यात में हालिया उछाल इस बात का प्रमाण है कि दुनिया अब ‘चाइना प्लस वन’ (China Plus One) रणनीति के तहत भारत की ओर आशा की दृष्टि से देख रही है।

निवेशकों को आश्वस्त करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जहां एक स्थिर लोकतंत्र, मजबूत जनसांख्यिकीय लाभांश (युवा आबादी), विशाल घरेलू बाजार और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसी अनूठी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार करने की सुगमता) में हुए सुधारों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए खोले गए नए क्षेत्रों का हवाला देते हुए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से भारत में निवेश करने का आह्वान किया। मंत्री महोदय ने विश्वास जताया कि भारत अपने निर्यातकों की कड़ी मेहनत और सरकार की व्यापार-अनुकूल नीतियों के बल पर वर्ष 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर (वस्तुओं और सेवाओं दोनों में) के कुल निर्यात लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त कर लेगा।