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आगामी UNFCCC COP31 के लिए भारत ने कसी कमर: वैश्विक मंच से की ‘महत्वाकांक्षी लेकिन संतुलित’ जलवायु समझौतों की जोरदार अपील

अभिषेक सिंह | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के गहराते वैश्विक संकट के बीच, भारत ने आगामी संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (UNFCCC) के 31वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP31) के लिए अपना कूटनीतिक और रणनीतिक रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नई दिल्ली में जारी एक आधिकारिक बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अब केवल खोखले वादों से काम नहीं चलेगा, बल्कि लचीलेपन, व्यावहारिकता और पारस्परिक सम्मान के साथ एक “महत्वाकांक्षी और संतुलित परिणाम” (Ambitious and Balanced Outcome) प्राप्त करने पर जोर दिया जाना चाहिए।

भारत का यह स्पष्ट रुख विकसित देशों पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है, जो अक्सर विकासशील देशों पर उत्सर्जन कम करने का दबाव तो बनाते हैं, लेकिन ऐतिहासिक रूप से अपने द्वारा फैलाए गए कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी लेने से बचते हैं। भारत ने हमेशा से ‘समान लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं’ (Common But Differentiated Responsibilities – CBDR-RC) के सिद्धांत की वकालत की है। इसका सीधा अर्थ है कि जिन विकसित देशों ने औद्योगीकरण के दौरान पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, उन्हें अब जलवायु वित्त (Climate Finance) और तकनीक के हस्तांतरण (Technology Transfer) में सबसे बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। भारत ने जोर देकर कहा है कि बिना पर्याप्त, सस्ते और सुलभ वित्तीय सहायता के, विकासशील देशों के लिए ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) एक असंभव कार्य है।

घरेलू मोर्चे पर अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए भारत ने वैश्विक मंच को संदेश दिया है कि वह केवल मांग नहीं कर रहा, बल्कि नेतृत्व भी कर रहा है। भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के लक्ष्यों को निर्धारित समय से बहुत पहले ही हासिल कर लिया है। ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’, ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’, और 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य भारत की प्रतिबद्धता के जीवंत प्रमाण हैं।

इसके अतिरिक्त, भारत COP31 में ‘मिशन लाइफ़’ (Mission LiFE – Lifestyle for Environment) के विचार को प्रमुखता से उठाएगा। भारत का मानना है कि केवल सरकारी नीतियों या बड़ी कंपनियों के बदलाव से जलवायु परिवर्तन को नहीं रोका जा सकता; इसके लिए पूरी दुनिया के नागरिकों को अत्यधिक उपभोग (Mindless Consumption) की प्रवृत्ति को छोड़कर पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनानी होगी। ग्लोबल साउथ (Global South) की सबसे बुलंद आवाज के रूप में, भारत COP31 में अफ्रीकी देशों, छोटे द्वीपीय राष्ट्रों और अन्य विकासशील देशों के अधिकारों का दृढ़ता से बचाव करेगा। भारत का स्पष्ट संदेश है कि जलवायु न्याय (Climate Justice) के बिना, दुनिया नेट ज़ीरो (Net Zero) के अपने लक्ष्य को कभी हासिल नहीं कर पाएगी।