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दूरसंचार गुणवत्ता में सुधार की दिशा में बड़ा कदम: ट्राई (TRAI) ने पंजाब के फाजिल्का में मोबाइल नेटवर्क का किया सघन जमीनी आकलन

राघवेंद्र प्रताप सिंह | द इंडियन व्यू

चंडीगढ़/नई दिल्ली: देश भर के मोबाइल उपभोक्ताओं को निर्बाध, उच्च गुणवत्ता वाली और कॉल-ड्रॉप मुक्त दूरसंचार सेवाएं सुनिश्चित करने के अपने कड़े संकल्प के तहत, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने अपनी निगरानी प्रक्रिया को और अधिक सख्त कर दिया है। इसी कड़ी में, ट्राई ने पंजाब लाइसेंस सर्विस एरिया (LSA) के अंतर्गत सीमावर्ती शहर फाजिल्का और उसके आसपास के ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में विभिन्न टेलीकॉम ऑपरेटरों के मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता (Quality of Service – QoS) का व्यापक और सघन जमीनी आकलन (Drive Test) किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश भर से उपभोक्ता लगातार धीमी इंटरनेट स्पीड और कॉल कटने की शिकायतें कर रहे हैं।

इस सघन अभियान के दौरान ट्राई की विशेष तकनीकी टीमों ने अत्याधुनिक उपकरणों से लैस वाहनों का उपयोग करते हुए पूरे फाजिल्का जिले के प्रमुख राजमार्गों, रिहायशी कॉलोनियों, व्यावसायिक क्षेत्रों और सुदूर गांवों में नेटवर्क की पहुंच और उसकी क्षमता की जांच की। इस ड्राइव टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या रिलायंस जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और बीएसएनएल जैसी प्रमुख दूरसंचार कंपनियां ट्राई द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप वॉयस कॉल और डेटा स्पीड प्रदान कर रही हैं या नहीं। विशेष रूप से 4G और 5G नेटवर्क के कवरेज, कॉल सेटअप सक्सेस रेट (CSSR), कॉल ड्रॉप रेट (CDR) और डाउनलोड/अपलोड स्पीड की वास्तविक स्थिति का बारीकी से तकनीकी विश्लेषण किया गया।

ट्राई के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह परीक्षण केवल रूटीन जांच का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह भविष्य के दूरसंचार ढांचे को मजबूत करने की एक बड़ी रणनीति है। फाजिल्का जैसे सीमावर्ती जिलों में नेटवर्क की स्थिरता न केवल आम उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। परीक्षण के दौरान प्राप्त हुए डेटा का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा और यदि कोई भी टेलीकॉम ऑपरेटर तय मानकों (बेंचमार्क) से नीचे प्रदर्शन करता हुआ पाया जाता है, तो ट्राई के कड़े नियमों के तहत उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि ट्राई ने हाल ही में ‘क्वालिटी ऑफ सर्विस’ (QoS) के नए और अधिक सख्त नियम जारी किए हैं, जिन्हें देश भर में लागू किया जा रहा है। इन नए नियमों के तहत अब दूरसंचार कंपनियों को राज्य स्तर के बजाय जिला और तहसील स्तर पर अपने नेटवर्क के प्रदर्शन की रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके साथ ही, देश में उपग्रह संचार (Satellite Communication) सेवाओं के वाणिज्यिक रोलआउट से पहले एक पारदर्शी और प्रभावी नियामक ढांचा तैयार करने की दिशा में भी इस तरह के जमीनी डेटा का उपयोग किया जाएगा। फाजिल्का में हुआ यह परीक्षण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार अब उपभोक्ताओं के अधिकारों और डिजिटल इंडिया के विजन के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है।