ई-कचरा प्रबंधन और स्वच्छ कार्यस्थल की ओर बड़ी पहल: जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने ‘विशेष अभियान 6.0’ का किया शंखनाद

विवेक ओझा | द इंडियन व्यू
नई दिल्ली: सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, दक्षता और पर्यावरण के अनुकूल कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology – DBT) ने ‘विशेष अभियान 6.0’ (Special Campaign 6.0) की पूरे जोर-शोर से शुरुआत कर दी है। इस वर्ष के अभियान का सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण फोकस कार्यालयों और शोध संस्थानों में जमा हुए इलेक्ट्रॉनिक कचरे (E-Waste) के सुरक्षित, वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन पर रखा गया है। भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चलाया जा रहा यह अभियान 31 अक्टूबर तक जारी रहेगा।
आज के तेजी से बदलते तकनीकी युग में, सरकारी विभागों और विशेषकर जैव प्रौद्योगिकी जैसे उच्च तकनीकी अनुसंधान वाले विभागों में कंप्यूटर, सर्वर, पुराने प्रिंटर, अप्रचलित प्रयोगशाला उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जीवन चक्र बहुत छोटा हो गया है। समय के साथ ये उपकरण कबाड़ (Scrap) में तब्दील हो जाते हैं और कार्यालयों के मूल्यवान स्थान को घेर लेते हैं। यदि इस ई-कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण न किया जाए, तो इनमें मौजूद सीसा, पारा और कैडमियम जैसे जहरीले तत्व पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। इसी खतरे को भांपते हुए डीबीटी ने इस बार ई-कचरे को जड़ से साफ करने का बीड़ा उठाया है।
इस अभियान के तहत, नई दिल्ली स्थित डीबीटी मुख्यालय के साथ-साथ देश भर में फैले इसके सभी स्वायत्त संस्थानों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं में व्यापक सफाई और छंटाई अभियान चलाया जा रहा है। वर्षों से बंद पड़े स्टोर रूम्स और रिकॉर्ड रूम्स की सफाई की जा रही है। ऐसे सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जो अब उपयोग में नहीं हैं या जिनकी मरम्मत संभव नहीं है, उनकी सूची बनाकर उन्हें सरकारी नियमों के अनुसार अधिकृत ई-वेस्ट रीसाइकलर्स को सौंपा जा रहा है। इसके साथ ही, दशकों पुरानी भौतिक फाइलों (Physical Files) की भी समीक्षा की जा रही है, और अनावश्यक फाइलों को सुरक्षित तरीके से नष्ट करके पूरी कार्यप्रणाली को ‘ई-ऑफिस’ (e-Office) प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
विभाग के सचिव ने अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वच्छता केवल एक पखवाड़े का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे हर कर्मचारी की दैनिक आदत का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि पुराने स्क्रैप और ई-कचरे की नीलामी से न केवल कार्यालयों में हजारों वर्ग फुट अतिरिक्त जगह खाली होगी, जिसका उपयोग शोधकर्ताओं के लिए बेहतर सुविधाएं बनाने में किया जा सकेगा, बल्कि इससे सरकार को अतिरिक्त गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) भी प्राप्त होगा। यह अभियान भारत सरकार के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और ‘टिकाऊ विकास लक्ष्यों’ (SDGs) को प्राप्त करने की दिशा में एक अत्यंत सार्थक कदम माना जा रहा है।