सटीक नीति निर्माण के लिए डेटा का सशक्तिकरण: MoSPI और फर्स्ट इंडिया फाउंडेशन के बीच अनुसंधान व विश्लेषण पर ऐतिहासिक एमओयू

सरिता त्रिपाठी | द इंडियन व्यू
नई दिल्ली: भारत को एक ज्ञान-आधारित और डेटा-संचालित अर्थव्यवस्था (Data-Driven Economy) के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम उठाते हुए, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने नई दिल्ली स्थित प्रमुख थिंक टैंक ‘फर्स्ट इंडिया फाउंडेशन’ (First India Foundation) के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस रणनीतिक साझेदारी का मुख्य उद्देश्य आधिकारिक सांख्यिकी, वृहद आर्थिक अनुसंधान (Macroeconomic Research), और उन्नत डेटा विश्लेषण (Data Analytics) के क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
आधुनिक शासन व्यवस्था में, जहां हर दिन करोड़ों नागरिकों से जुड़ी योजनाएं बनती हैं, वहां सटीक, विश्वसनीय और समयबद्ध डेटा की भूमिका किसी भी अन्य संसाधन से अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। अब तक सरकारी नीतियां काफी हद तक पारंपरिक सर्वेक्षणों और सीमित सैंपलिंग पर निर्भर रही हैं, जिनमें समय अधिक लगता था और कई बार जमीनी हकीकत का पूरा अक्स नहीं मिल पाता था। MoSPI और फर्स्ट इंडिया फाउंडेशन का यह गठजोड़ इसी खाई को पाटने का काम करेगा। फर्स्ट इंडिया फाउंडेशन अपने उन्नत तकनीकी संसाधनों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), और मशीन लर्निंग (ML) टूल का उपयोग करके मंत्रालय के विशाल डेटाबेस का विश्लेषण करेगा, जिससे नीति निर्माताओं को वास्तविक समय (Real-time) की अंतर्दृष्टि (Insights) प्राप्त हो सकेगी।
इस एमओयू के तहत, दोनों संस्थाएं मुख्य रूप से राष्ट्रीय आय लेखांकन (National Income Accounting), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति के रुझान, और रोजगार सृजन के आंकड़ों पर संयुक्त अनुसंधान करेंगी। इसके अतिरिक्त, असंगठित क्षेत्र (Unorganized Sector) और गिग इकॉनमी (Gig Economy) से जुड़े जटिल आंकड़ों को मुख्यधारा के सांख्यिकीय ढांचे में शामिल करने के लिए नई कार्यप्रणालियां (Methodologies) विकसित की जाएंगी। यह कदम भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) गणना को अधिक पारदर्शी और वैश्विक मानकों के पूर्णतः अनुरूप बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
हस्ताक्षर समारोह के दौरान MoSPI के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के लक्ष्य को तब तक पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता, जब तक विकास के आंकड़े पूरी तरह से त्रुटिहीन न हों। उन्होंने विश्वास जताया कि फर्स्ट इंडिया फाउंडेशन की विशेषज्ञता से मंत्रालय को अपने सर्वेक्षणों के डिजाइन में सुधार करने और नागरिक-केंद्रित नीतियों (Citizen-Centric Policies) के प्रभाव का अधिक सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी। वहीं फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने इसे ‘डेटा के लोकतंत्रीकरण’ (Democratization of Data) की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया, जो शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए भी सरकारी आंकड़ों को अधिक सुलभ और समझने योग्य बनाएगा।