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नौनिहालों की जान से खिलवाड़ पर कड़ा रुख: दरभंगा में जर्जर स्कूल की छत का NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान, बिहार सरकार से तलब की विस्तृत रिपोर्ट

अभिषेक सिंह | द इंडियन व्यू

पटना/नई दिल्ली: शिक्षा के मंदिर में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत विचलित करने वाली घटना पर गंभीर रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बिहार राज्य के दरभंगा जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की दयनीय और खतरनाक स्थिति का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस स्कूल के भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कक्षा की छत को गिरने से बचाने के लिए सहारा देने वाले मुख्य पिलर के टूट जाने पर, उसे लकड़ी के पुराने बेंचों और बांस-बल्लियों पर टिका दिया गया है। इसी मौत के साये के ठीक नीचे बैठकर मासूम बच्चे हर दिन पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

आयोग ने इस भयावह स्थिति को बच्चों के ‘जीवन के अधिकार’ (Right to Life) और ‘शिक्षा के अधिकार’ (Right to Education – RTE) का घोर और सीधा उल्लंघन माना है। RTE अधिनियम न केवल मुफ्त शिक्षा की गारंटी देता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि बच्चों को सीखने के लिए एक सुरक्षित, भयमुक्त और अनुकूल वातावरण मिले। NHRC ने कड़े शब्दों में कहा है कि देश का भविष्य माने जाने वाले इन नौनिहालों को हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल आने के लिए मजबूर करना स्थानीय प्रशासन, शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की घोर लापरवाही, संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, NHRC ने बिहार सरकार के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को कड़ा नोटिस जारी किया है। आयोग ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। इस रिपोर्ट में राज्य सरकार को स्पष्ट करना होगा कि बच्चों को इस जर्जर भवन में पढ़ने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है और क्या स्कूल को किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है या नहीं। इसके साथ ही, लापरवाही बरतने वाले संबंधित शिक्षा अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है, इसका भी पूरा ब्यौरा मांगा गया है।

NHRC ने अपने निर्देश में यह भी रेखांकित किया है कि यह केवल एक स्कूल का मामला नहीं हो सकता। आयोग ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि वह पूरे राज्य में विशेषकर ग्रामीण इलाकों में स्थित सभी सरकारी स्कूलों के भवनों का तत्काल सेफ्टी ऑडिट (Safety Audit) कराए। जिन स्कूलों की इमारतें क्षतिग्रस्त या खतरनाक घोषित की जा चुकी हैं, वहां तुरंत कक्षाओं का संचालन रोका जाए और मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अभिभावकों ने NHRC के इस हस्तक्षेप का पुरजोर स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे गहरी नींद में सोया हुआ सिस्टम जागेगा और भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी को टाला जा सकेगा।