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ग्रामीण भारत में दिखा जनभागीदारी का अद्भुत असर: पंचायती राज मंत्रालय और DDWS का संयुक्त स्वच्छता प्रयास बना मिसाल, ‘स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ का संकल्प

विवेक ओझा | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ (SHS-2026) अभियान के अंतर्गत भारतीय गांवों की तस्वीर बदलने के लिए पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) द्वारा चलाया गया संयुक्त राष्ट्रव्यापी प्रयास एक ऐतिहासिक सफलता के रूप में सामने आया है। ‘स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ की केंद्रीय थीम पर आधारित इस महा-अभियान ने साबित कर दिया है कि जब सरकारी मशीनरी और ग्राम पंचायतें (स्थानीय लोकतंत्र की सबसे मजबूत इकाई) मिलकर काम करती हैं, तो सबसे कठिन लक्ष्य भी आसानी से हासिल किए जा सकते हैं। इस अभियान में ग्रामीण भारत की अभूतपूर्व जनभागीदारी ने स्वच्छता को केवल एक सरकारी योजना से निकालकर एक स्थायी जीवनशैली में बदल दिया है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण (SBM-G Phase II) के तहत, अब गांवों में केवल शौचालयों के निर्माण पर ही जोर नहीं दिया जा रहा, बल्कि असली चुनौती गांवों को ‘ओडीएफ प्लस’ (ODF Plus Model) बनाने की है, जिसमें ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (Solid and Liquid Waste Management – SLWM) सबसे अहम है। इसी चुनौती से पार पाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने देश की ढाई लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम 2026’ को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया था। अभियान के दौरान, ग्राम सभाओं की विशेष बैठकें आयोजित की गईं, जहां पंचायत प्रतिनिधियों (सरपंच, वार्ड सदस्य), स्वच्छाग्रहियों और आम ग्रामीणों ने मिलकर अपने-अपने गांवों से कचरे के ढेरों (Legacy Waste) को साफ करने का संकल्प लिया।

अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि गांवों में ‘कचरे से कंचन’ (Waste to Wealth) की अवधारणा को जमीन पर उतारना रही। महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के सहयोग से घर-घर जाकर गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग इकट्ठा (Source Segregation) करने की प्रक्रिया को संस्थागत रूप दिया गया। गीले जैविक कचरे से सामुदायिक खाद (Compost) और बायोगैस बनाने के लिए ‘गोबरधन योजना’ (GOBARdhan) के तहत नए संयंत्र चालू किए गए। वहीं, प्लास्टिक और ई-कचरे के निस्तारण के लिए ब्लॉक स्तर पर ‘प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों’ को सक्रिय किया गया, जो कचरे को रिसाइकिल करके सड़क निर्माण और अन्य उपयोगों के लिए भेज रही हैं।

डीडीडब्ल्यूएस के अधिकारियों के अनुसार, इस पखवाड़े के दौरान लाखों ग्रामीणों ने नालियों की सफाई, जलस्रोतों (तालाबों, कुओं) के जीर्णोद्धार और सार्वजनिक स्थानों पर वृहद वृक्षारोपण के लिए ‘श्रमदान’ किया। स्कूली बच्चों ने स्वच्छता रैलियां निकालकर बुजुर्गों को खुले में शौच के नुकसान और हाथ धोने के महत्व के प्रति जागरूक किया। पंचायती राज मंत्रालय का यह संयुक्त प्रयास इस बात की पुष्टि करता है कि ग्रामीण स्वास्थ्य और कुपोषण की समस्या का सबसे बड़ा समाधान एक स्वच्छ और रोगमुक्त परिवेश में ही छिपा है। यह अभियान ‘संपूर्ण स्वच्छता’ के लक्ष्य की दिशा में नए भारत के ग्रामीण नागरिकों के अटल संकल्प का एक शानदार घोषणापत्र है।