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हुनर और कौशल से दुनिया में भारत का डंका: प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ल्डस्किल्स विजेताओं से किया संवाद, ‘स्किल इंडिया’ के विजन को मिली नई उड़ान

विवेक ओझा

नई दिल्ली : वैश्विक मंच पर भारतीय युवाओं के कौशल (Skill) का लोहा मनवाते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता 2026 के भारतीय दल के विजेताओं और प्रतिभागियों से सीधा संवाद किया। नई दिल्ली के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित इस मुलाकात में युवाओं के चेहरे पर जीत की चमक और देश का नाम रोशन करने का गौरव साफ दिखाई दे रहा था। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर युवाओं के हुनर की सराहना करते हुए कहा कि भारत के युवाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो मुकाम हासिल किया है, वह ‘स्किल इंडिया’ अभियान की सफलता का एक जीवंत प्रमाण है।

वैश्विक मंच पर टीम इंडिया का ऐतिहासिक प्रदर्शन
चीन के शंघाई में आयोजित की गई वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में भारतीय दल ने अब तक का अपना सबसे ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। कुल 70 देशों की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच भारत ने वैश्विक रैंकिंग में 10वां स्थान हासिल कर टॉप-10 देशों में अपनी जगह पक्की की।

इस वैश्विक प्रतियोगिता के मुख्य आकर्षण इस प्रकार रहे:

  • पदकों की बौछार: भारतीय युवाओं ने देश के लिए 6 रजत पदक (Silver Medals) और 20 मेडल फॉर एक्सीलेंस (Medallions for Excellence) जीते।
  • अब तक का सबसे बड़ा दल: इस बार भारत की ओर से अब तक का सबसे बड़ा और विविधता से भरपूर दल भेजा गया था, जिसमें 70 प्रतियोगियों ने 63 विभिन्न कौशलों (Skills) में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
  • कौशलों की विविधता: रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग से लेकर पारंपरिक और औद्योगिक कौशलों तक, भारतीय युवाओं ने हर क्षेत्र में वैश्विक मानकों को चुनौती दी।

प्रधानमंत्री मोदी के संवाद की 4 बड़ी बातें: युवाओं को मिला नया मंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने विजेताओं और प्रतिभागियों की हौसलाअफजाई करते हुए देश के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र (Skill Ecosystem) को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं, जो आने वाले समय में देश के युवाओं के लिए मार्गदर्शक साबित होंगी:

  1. अकादमिक डिग्री जितनी ही अहम है व्यावहारिक समझ: प्रधानमंत्री ने पारंपरिक शिक्षा प्रणाली और व्यावहारिक ज्ञान के बीच के संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की तेजी से बदलती दुनिया में केवल किताबी ज्ञान या अकादमिक डिग्रियां काफी नहीं हैं, बल्कि व्यावहारिक कौशल (Practical Skills) भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। जो हाथ काम करना जानते हैं, वे देश की प्रगति की असली रीढ़ हैं।
  2. IITs और IIMs से कम नहीं हैं कौशल संस्थान: सरकार के कौशल विकास के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश में कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने वाले संस्थानों का महत्व किसी भी आईआईटी (IIT) या आईआईएम (IIM) से कम नहीं है। कौशल केंद्रों से निकले युवा उद्योगों की तात्कालिक और भविष्य की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं।
  3. युवा बनें ‘स्किल एंबेसडर’: प्रधानमंत्री ने प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले और भाग लेने वाले सभी युवाओं से एक विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि वे समाज और अपने क्षेत्रों में ‘स्किल एंबेसडर’ (कौशल राजदूत) के रूप में कार्य करें। वे अन्य लाखों युवाओं को प्रेरित करें कि कौशल सीखना कोई छोटा काम नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर और सशक्त बनने का सबसे सीधा रास्ता है।
  4. तकनीक के साथ निरंतर अपग्रेड होना जरूरी: बदलते वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए पीएम ने युवाओं को सलाह दी कि वे कभी भी अपनी सीख को रुकने न दें। उद्योग 4.0 (Industry 4.0) और नई तकनीकों (जैसे AI और ऑटोमेशन) के इस दौर में खुद को लगातार अपग्रेड और री-स्किल (Re-skill) करते रहना अनिवार्य है ताकि वैश्विक स्तर पर उनकी प्रासंगिकता बनी रहे।

‘स्किल इंडिया’ के नए युग की शुरुआत
इस खास मुलाकात के दौरान केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी और शिक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। संवाद के दौरान युवाओं ने केवल अपनी जीत की कहानियां ही नहीं सुनाईं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आधुनिक टूल्स, उन्नत सॉफ्टवेयर और जटिल तकनीकी प्रणालियों के साथ काम करने के अपने अनुभवों को भी प्रधानमंत्री के साथ साझा किया।

यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि भारत का युवा अब सिर्फ नौकरियों का आकांक्षी (Job Seeker) नहीं है, बल्कि अपने हुनर के दम पर वैश्विक स्तर पर बदलाव लाने वाला (Change Maker) बन चुका है। वर्ल्डस्किल्स 2026 में भारत का यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों में देश के करोड़ों युवाओं को अपने हुनर को तराशने और वैश्विक पटल पर भारत का नाम चमकाने के लिए प्रेरित करेगा।