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लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स सेक्टर में महाक्रांति: भारतीय डाक विभाग और ‘ब्लू डार्ट’ के बीच ऐतिहासिक समझौता, देश के कोने-कोने तक पहुंचेगी विश्वस्तरीय पार्सल सेवा

राघवेंद्र प्रताप सिंह | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: भारत में ई-कॉमर्स, व्यापार और रसद (Logistics) सेवाओं की तस्वीर को पूरी तरह से बदलने के लिए एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। संचार मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय डाक विभाग (Department of Posts – India Post) और देश की प्रमुख एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स कंपनी ‘ब्लू डार्ट एक्सप्रेस लिमिटेड’ (Blue Dart Express Ltd) ने 9 अक्टूबर 2026 को पूरे भारत में पार्सल सेवाओं को तेज, सुरक्षित और सुलभ बनाने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता सरकारी बुनियादी ढांचे की विशाल पहुंच और निजी क्षेत्र की आधुनिक तकनीक व गति का एक अद्वितीय और आदर्श संगम है।

भारतीय डाक के पास वर्तमान में लगभग 1.56 लाख डाकघरों का दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत डाकघर ग्रामीण और सुदूर इलाकों में स्थित हैं। दूसरी ओर, ब्लू डार्ट के पास अत्याधुनिक विमानन नेटवर्क (Aviation Network), स्वचालित सॉर्टिंग तकनीक और सप्लाई चेन प्रबंधन का दशकों का कॉर्पोरेट अनुभव है। इस ऐतिहासिक एमओयू (MoU) के तहत, दोनों संस्थाएं एक-दूसरे के नेटवर्क का उपयोग करेंगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब ब्लू डार्ट के ग्राहक अपने पार्सल को भारत के किसी भी सुदूर ग्रामीण डाकघर से भेज या प्राप्त कर सकेंगे, जबकि भारतीय डाक के उपभोक्ताओं को ब्लू डार्ट की एक्सप्रेस हवाई वितरण सेवाओं (Air Express Delivery) का सीधा लाभ मिलेगा।

इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से उभर रहे छोटे और मझोले उद्यमों (MSMEs), महिला उद्यमियों और कारीगरों को होगा। अब तक ग्रामीण कारीगरों को अपने उत्पाद (जैसे हस्तशिल्प, खादी, कृषि उत्पाद) बड़े शहरों या अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में भारी परिवहन लागत और देरी का सामना करना पड़ता था। इस साझेदारी से ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ (अंतिम छोर तक वितरण) की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसके अतिरिक्त, इस समझौते के तहत प्रमुख शहरों में ‘ऑटोमेटेड पार्सल लॉकर’ (Automated Parcel Lockers) स्थापित करने की भी योजना है, जहां ग्राहक अपनी सुविधानुसार 24×7 कभी भी अपना पार्सल प्राप्त कर सकेंगे।

केंद्रीय संचार मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने इस समझौते को ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक बताया है। अधिकारियों के अनुसार, ई-कॉमर्स बूम के इस दौर में डाक विभाग खुद को केवल चिट्ठियों तक सीमित नहीं रख सकता। यह साझेदारी डाक विभाग के राजस्व में भारी वृद्धि करेगी और उसे वैश्विक लॉजिस्टिक्स बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिया पोस्ट और ब्लू डार्ट का यह तालमेल भारत की लॉजिस्टिक्स लागत (Logistics Cost) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के वर्तमान 13 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत तक लाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।