‘विकसित भारत 2047’ का ठोस ब्लूप्रिंट: प्रधानमंत्री मोदी ने ‘शासन के सबक’ पर साझा किया महत्वपूर्ण लेख, सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक को बताया विकास की महाकुंजी

सरिता त्रिपाठी | द इंडियन व्यू
नई दिल्ली: भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर देश को एक विकसित राष्ट्र (Developed Nation) बनाने के महासंकल्प को वैचारिक और व्यावहारिक धरातल प्रदान करते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सुशासन (Good Governance) और भविष्य के प्रशासनिक सुधारों पर एक अत्यंत विचारोत्तेजक लेख साझा किया है। ‘विकसित भारत 2047 के लिए शासन के सबक’ (Governance Lessons for Viksit Bharat 2047) शीर्षक वाले इस लेख और विचार-मंथन में, प्रधानमंत्री ने अपने 25 वर्षों के शासन प्रमुख (मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री) के गहरे अनुभवों को आधार बनाते हुए यह स्पष्ट किया है कि कोई भी राष्ट्र केवल प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि मजबूत संस्थाओं और पारदर्शी शासन व्यवस्था से महान बनता है।
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में इस बात पर गहरा जोर दिया है कि 21वीं सदी का नया भारत पुरानी और बोझिल लालफीताशाही (Red Tapism) के सहारे आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ (Minimum Government, Maximum Governance) के अपने मूल मंत्र की व्याख्या करते हुए कहा कि सरकार की भूमिका नागरिक के जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप करने की नहीं, बल्कि उसे सशक्त बनाने (Empowerment) और उसके लिए एक सुगम पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) तैयार करने की होनी चाहिए। लेख में इस बात का विस्तार से उल्लेख किया गया है कि कैसे पिछले एक दशक में लगभग 40,000 से अधिक पुराने और अप्रचलित कानूनों (Archaic Laws) और अनुपालनों (Compliances) को खत्म कर व्यापार और जीवन जीने की सुगमता (Ease of Doing Business & Ease of Living) को बढ़ाया गया है।
शासन में प्रौद्योगिकी (Technology) के समावेश को विकास की महाकुंजी बताते हुए, प्रधानमंत्री ने ‘जेएएम ट्रिनिटी’ (JAM Trinity – जन धन, आधार और मोबाइल) का उदाहरण दिया। इस व्यवस्था ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के जरिए बिचौलियों की व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है, जिससे सरकारी खजाने के लाखों करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचे हैं और योजना का लाभ सीधे असली हकदार तक पहुंचा है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 2047 का विकसित भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ब्लॉकचेन (Blockchain) और डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics) जैसी तकनीकों पर आधारित ‘स्मार्ट और प्रो-एक्टिव गवर्नेंस’ का युग होगा, जहां नागरिक को अपनी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
लेख का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘जनभागीदारी’ (Public Participation) पर दिया गया जोर है। प्रधानमंत्री का मानना है कि स्वच्छ भारत अभियान से लेकर जल जीवन मिशन तक, कोई भी बड़ी सरकारी योजना तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक वह एक जन-आंदोलन (Mass Movement) का रूप न ले ले। उन्होंने देश के युवा नौकरशाहों, नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों से आह्वान किया है कि वे 2047 के लक्ष्य को अपना व्यक्तिगत लक्ष्य मानें। यह लेख केवल एक राजनीतिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक सशक्त, भ्रष्टाचार-मुक्त, और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी रोडमैप है, जो देश के नीति-निर्धारकों के लिए भविष्य का मार्गदर्शक साबित होगा।