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समुद्री संसाधनों से संवरेगा देश का भविष्य: प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ‘नीली अर्थव्यवस्था’ (Blue Economy) पर साझा किया विजन, रोजगार और विकास के खुलेंगे नए द्वार

राघवेंद्र प्रताप सिंह | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: भारत की 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा (Coastline) और विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) अब केवल मछली पकड़ने या सीमाओं की रक्षा करने तक सीमित नहीं रहेंगे; यह अब भारत के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा और शक्तिशाली इंजन बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की ‘नीली अर्थव्यवस्था’ (Blue Economy) की अपार क्षमताओं, भविष्य की रणनीतियों और इसके जरिए रोजगार सृजन पर एक बेहद विस्तृत और शोधपरक लेख साझा किया है। यह लेख स्पष्ट करता है कि भारत का भविष्य जमीन के साथ-साथ अब गहरे समुद्रों (Deep Oceans) में छिपी हुई असीम संपदा से संवरेगा।

‘नीली अर्थव्यवस्था’ का तात्पर्य समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem) के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए महासागरों, समुद्रों और तटीय क्षेत्रों के संसाधनों का स्थायी (Sustainable) आर्थिक उपयोग करना है। प्रधानमंत्री ने अपने लेख में ‘सागरमाला’ (Sagarmala) परियोजना का विशेष उल्लेख किया, जिसने पिछले एक दशक में भारत के तटीय बुनियादी ढांचे (Port-led Development) में अभूतपूर्व क्रांति ला दी है। देश के प्रमुख बंदरगाहों की कार्गो हैंडलिंग क्षमता दोगुनी हो गई है, और उन्हें सीधे राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ा जा रहा है। इससे न केवल निर्यात में तेजी आई है, बल्कि लॉजिस्टिक्स की लागत में भी भारी कमी दर्ज की गई है।

लेख में तटीय समुदाय और विशेषकर मछुआरों के कल्याण को ‘नीली अर्थव्यवस्था’ के केंद्र में रखा गया है। प्रधानमंत्री ने ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) का जिक्र किया, जिसके तहत करोड़ों रुपये के निवेश से मछली पालन को एक आधुनिक और लाभदायक उद्योग में बदला जा रहा है। गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए मछुआरों को आधुनिक नौकाएं, नेविगेशन उपकरण और कोल्ड स्टोरेज की सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, तटीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समुद्री शैवाल (Seaweed) की खेती और सजावटी मछली पालन (Ornamental Fisheries) को एक बड़े वैकल्पिक रोजगार के रूप में विकसित किया जा रहा है।

भविष्य की ऊर्जा और खनिज जरूरतों के लिए, प्रधानमंत्री ने ‘डीप ओशन मिशन’ (Deep Ocean Mission) पर प्रकाश डाला। इस अत्यंत महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक मिशन के तहत भारत समुद्र के 6,000 मीटर नीचे पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स (Critical Minerals), दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और समुद्री तापीय ऊर्जा (Ocean Thermal Energy) की खोज कर रहा है, जो भारत के हरित ऊर्जा संक्रमण के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, समुद्र तटीय पवन ऊर्जा (Offshore Wind Energy) और मरीन टूरिज्म (जैसे अंडमान और लक्षद्वीप का विकास) भी इस विजन का प्रमुख हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री का यह विस्तृत लेख इस बात की गारंटी है कि भारत हिंद महासागर में केवल एक सामरिक शक्ति नहीं, बल्कि एक ‘ब्लू इकोनॉमी पावरहाउस’ के रूप में अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तरह तैयार है।