सुपोषित, सुरक्षित और सशक्त भारत की नींव: प्रधानमंत्री मोदी ने महिला और बाल विकास शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को किया संबोधित

सरिता त्रिपाठी
नई दिल्ली: महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा 8 और 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला’ की परिकल्पना के तहत आयोजित दूसरा महत्वपूर्ण सम्मेलन था। शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री मोदी ने की, जहां उन्होंने देश की महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास के लिए केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत समन्वय पर जोर दिया।
सहकारी संघवाद और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सामूहिक स्वामित्व
इस दो दिवसीय राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राजनीतिक नेतृत्व, महिला एवं बाल विकास मंत्रियों और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को सुदृढ़ करना और केंद्र-राज्य के घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से विकास परिणामों की गति को तेज करना था।
सम्मेलन के 4 मुख्य केंद्रित क्षेत्र (Key Pillars):
- कुपोषण मुक्त भारत (सुपोषित भारत): बेहतर पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) के लिए देश भर के आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम और आधुनिक बनाने पर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।
- कमजोर बच्चों का संरक्षण: विपरीत परिस्थितियों और असुरक्षित माहौल में रह रहे बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विचार-विमर्श हुआ।
- महिला सुरक्षा: सार्वजनिक और निजी स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रशासनिक और तकनीकी कदम उठाने पर जोर दिया गया।
- महिला सशक्तीकरण: केंद्र और राज्य सरकारों की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के रोडमैप पर चर्चा हुई।
विकसित भारत@2047 के लिए मजबूत कदम
समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक सक्षम, सुरक्षित और सुपोषित समाज ही ‘विकसित भारत@2047’ की सबसे मजबूत बुनियाद बन सकता है। सम्मेलन में बेहतर शासन, प्रभावी सेवा वितरण (Service Delivery) और एक समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने के लिए केंद्र और राज्यों ने मिलकर एक साझा नीतिगत ढांचा तैयार किया है, जो आने वाले समय में जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव लाएगा।