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हिमालयी क्षेत्र में जनस्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा केलांग में रखेंगे आईसीएमआर के ऐतिहासिक केंद्र की आधारशिला

अभिषेक सिंह

लाहौल और स्पीति/नई दिल्ली: भारत के दुर्गम और अत्यधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक क्रांति होने जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा 12 अक्टूबर 2026 को हिमाचल प्रदेश के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिले लाहौल और स्पीति के केलांग (Keylong) में आईसीएमआर (ICMR) के पहले ‘अधिक ऊंचाई चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र’ (ICMR-CHAMP) का औपचारिक शिलान्यास करेंगे। भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के तहत भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा स्थापित किया जा रहा यह केंद्र उच्च पर्वतीय और जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों के लिए देश का अग्रणी संस्थान बनेगा।

उच्च पर्वतीय क्षेत्रों की विशिष्ट स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान
हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र अपनी विषम भौगोलिक स्थिति, कठिन इलाकों, भौगोलिक अलगाव और भीषण ठंड के लिए जाना जाता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में रहने वाले जनजातीय समुदायों और वहां तैनात सुरक्षा बलों को विशिष्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ऊंचाई पर शरीर की कार्यप्रणाली में बदलाव और लगातार बढ़ती जलवायु परिवर्तनशीलता बीमारियों के पैटर्न और आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। आईसीएमआर का यह नया केंद्र इन विपरीत परिस्थितियों के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और बड़े पैमाने पर लागू होने योग्य अत्याधुनिक स्वास्थ्य समाधान विकसित करने की दिशा में काम करेगा।

अनुसंधान के 5 प्रमुख केंद्रित क्षेत्र (Key Scope of Research):

  1. पर्वतीय चिकित्सा (Mountain Medicine): अत्यधिक ऊंचाई पर मानव शरीर के अनुकूलन और उससे जुड़ी बीमारियों का गहरा वैज्ञानिक अध्ययन।
  2. जलवायु-संवेदनशील एवं उभरती बीमारियां: पर्यावरण में बदलाव के कारण पहाड़ों में पनप रहे संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों पर शोध।
  3. मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: कठिन इलाकों में रहने वाली महिलाओं और बच्चों के पोषण तथा प्रसव संबंधी स्वास्थ्य में सुधार लाना।
  4. मानसिक और व्यावसायिक स्वास्थ्य: पहाड़ों में लंबे समय तक रहने वाले स्थानीय लोगों और कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल से जुड़े स्वास्थ्य मुद्दों का समाधान।
  5. आपदा चिकित्सा (Disaster Medicine): भूस्खलन, हिमस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित चिकित्सा सहायता प्रणालियों का विकास।

डिजिटल हेल्थ और लॉजिस्टिक्स में स्वदेशी नवाचार
यह केंद्र दूरस्थ इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म और टेलीमेडिसिन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कठिन और बर्फबारी वाले रास्तों में आपातकालीन दवाएं, जीवन रक्षक टीके और ब्लड बैग पहुंचाने के लिए ‘ड्रोन-संचालित स्वास्थ्य लॉजिस्टिक्स’ (Drone-driven Health Logistics) का व्यापक परीक्षण और वास्तविक समय (Real-time) में जनस्वास्थ्य निगरानी प्रणालियों को इस केंद्र के माध्यम से लागू किया जाएगा।

राष्ट्रीय और वैश्विक अनुसंधान में भारत का बढ़ता कद
सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (AFMS) और हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ मिलकर यह संस्थान ट्रांसलेशनल अनुसंधान, वैज्ञानिक आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण में सहयोग करेगा। शिलान्यास समारोह के दौरान ‘ग्रीन आईसीएमआर कैंपस पहल’ के तहत स्थानीय औषधीय और हिमालयी पौधों का वृक्षारोपण भी किया जाएगा। साथ ही, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा एक विशेष स्मारक डाक लिफाफे का विमोचन भी किया जाएगा, जो इस ऐतिहासिक पहल को राष्ट्रीय पटल पर अंकित करेगा।