अंधकार पर प्रकाश और मातृशक्ति की विजय का पर्व: महालया के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी शुभकामनाएं, ‘देवी पक्ष’ का हुआ भव्य शुभारंभ

सरिता त्रिपाठी | द इंडियन व्यू
नई दिल्ली/कोलकाता: आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानी ‘सर्वपितृ अमावस्या’ के समापन के साथ ही सनातन परंपरा के सबसे पावन कालखंडों में से एक ‘देवी पक्ष’ की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने समस्त देशवासियों को ‘महालया’ (Mahalaya) की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। महालया का यह दिन विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, ओडिशा और देश के विभिन्न हिस्सों में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है, क्योंकि यह दिन शारदीय नवरात्रि और भव्य दुर्गा पूजा उत्सव के आगमन का उद्घोष करता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने बधाई संदेश में कहा कि महालया का यह पावन पर्व हम सभी के जीवन में सकारात्मकता, स्वास्थ्य और समृद्धि का संचार करे। उन्होंने प्रार्थना की कि मां दुर्गा का असीम आशीर्वाद समस्त समाज पर सदैव बना रहे और वे हमें बुराई, अन्याय और अज्ञान पर विजय प्राप्त करने की आंतरिक शक्ति प्रदान करें। प्रधानमंत्री का यह संदेश भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति (Nari Shakti) के शाश्वत महत्व और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता की गहरी भावना को उजागर करता है।
धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महालया के दिन ही मां दुर्गा कैलाश पर्वत से अपने मायके यानी पृथ्वी लोक (मर्त्यलोक) के लिए प्रस्थान करती हैं। इसी दिन ब्रह्ममुहूर्त में देश भर के करोड़ों लोग आकाशवाणी पर प्रसारित होने वाले बीरेंद्र कृष्ण भद्र के ऐतिहासिक और मंत्रमुग्ध कर देने वाले ‘महिषासुर मर्दिनी’ पाठ को सुनते हैं। इस अमर स्तुति में शंख की ध्वनि और चंडी पाठ के श्लोक हर घर और आंगन को दिव्य ऊर्जा से भर देते हैं। इसी दिन लोग अपने पूर्वजों को तर्पण अर्पित कर उन्हें विदाई देते हैं और देवी मां के स्वागत की औपचारिक तैयारी में जुट जाते हैं।
महालया का यह दिन कोलकाता के प्रसिद्ध कुम्हारटोली (Kumartuli) सहित देश भर के मूर्तिकारों के लिए भी बेहद पवित्र माना जाता है। आज के दिन ही कलाकार मां दुर्गा की प्रतिमाओं में ‘चक्षुदान’ (आंखें चित्रित करने की परंपरा) करते हैं, जिसके साथ ही प्रतिमाओं में प्राण-प्रतिष्ठा की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। प्रधानमंत्री के इस संदेश ने त्योहारों के इस मौसम में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और महिला सशक्तिकरण के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ किया है।