नागालैंड के मूर्धन्य सामाजिक-सांस्कृतिक नेता श्री कुची रंगाउ जेलियांग का निधन: प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा शोक, जनजातीय एकता के प्रयासों को किया याद

अभिषेक सिंह | द इंडियन व्यू
कोहिमा/नई दिल्ली: पूर्वोत्तर भारत और विशेष रूप से नागालैंड के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य में एक अपूरणीय क्षति दर्ज करते हुए, नागा समाज के वयोवृद्ध नेता, समाज सुधारक और स्वदेशी संस्कृति के संरक्षक श्री कुची रंगाउ जेलियांग (Shri Kuchi Rengau Zeliang) का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से पूरे पूर्वोत्तर में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उनके देहावसान पर गहरा दुख व्यक्त किया है और नागालैंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा समाज सेवा में उनके जीवनपर्यंत योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी शोक संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि श्री कुची रंगाउ जेलियांग जी के निधन से उन्हें अत्यंत आघात पहुंचा है। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर अपने विचार साझा करते हुए लिखा कि नागालैंड की समृद्ध जनजातीय परंपराओं को जीवंत रखने, विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए श्री जेलियांग द्वारा किए गए निस्वार्थ प्रयासों को सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार, उनके समर्थकों और जेलियांगरोंग (Zeliangrong) समुदाय के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
श्री कुची रंगाउ जेलियांग ने नागालैंड के पेरेन जिले और आसपास के असम व मणिपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में फैले जेलियांगरोंग समुदाय के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया था। वे स्वदेशी आस्था, पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक-संस्कृति के संरक्षण के लिए जाने जाते थे। जब आधुनिकता की अंधी दौड़ में कई पारंपरिक प्रथाएं विलुप्त हो रही थीं, तब उन्होंने युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने के लिए अनेक जमीनी आंदोलन और जागरूकता अभियान चलाए। उन्होंने रानी गाइदिन्ल्यू और हैपू जादोनंग जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए जनजातीय स्वाभिमान की मशाल को प्रज्वलित रखा।
नागालैंड के मुख्यमंत्री श्री नेफियू रियो और नागरिक समाज संगठनों के प्रमुखों ने भी उनके निधन को राज्य के लिए एक बड़ा आघात बताया है। स्थानीय नेताओं ने कहा कि श्री जेलियांग केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि वे संकट के समय समुदायों के बीच शांति और संवाद स्थापित करने वाले एक विश्वसनीय मार्गदर्शक थे। प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्त किया गया यह शोक संदेश इस बात की पुष्टि करता है कि देश का शीर्ष नेतृत्व पूर्वोत्तर के सुदूर इलाकों में राष्ट्र और समाज की सेवा में लगे मौन तपस्वियों के योगदान को कितनी गहराई से पहचानता है और उनका सम्मान करता है।