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भारत-जापान के प्रगाढ़ संबंधों की भावपूर्ण और ऐतिहासिक स्मृति: प्रधानमंत्री मोदी ने दिवंगत जापानी पीएम शिंजो आबे की पत्नी श्रीमती अकी आबे से की विशेष भेंट

अभिषेक सिंह | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: कूटनीति के पन्नों में कुछ रिश्ते औपचारिकताओं से बहुत ऊपर उठकर व्यक्तिगत आत्मीयता और गहरे सम्मान में तब्दील हो जाते हैं। ऐसा ही एक अविस्मरणीय और भावपूर्ण क्षण नई दिल्ली में देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे (Shinzo Abe) की पत्नी श्रीमती अकी आबे (Akie Abe) से विशेष मुलाकात की। यह भेंट केवल दो देशों के प्रतिनिधियों के बीच की मुलाकात नहीं थी, बल्कि यह भारत के एक सच्चे और महान मित्र की स्मृतियों को साझा करने का एक अत्यंत भावुक अवसर था।

शिंजो आबे, जिनकी जुलाई 2022 में एक दुर्भाग्यपूर्ण हमले में मृत्यु हो गई थी, को आधुनिक भारत-जापान संबंधों का वास्तविक वास्तुकार (Architect) माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी और शिंजो आबे के बीच एक अद्वितीय व्यक्तिगत रसायन (Personal Chemistry) था। इस मुलाकात के दौरान, पीएम मोदी ने श्रीमती अकी आबे के साथ उन पुराने दिनों को याद किया जब शिंजो आबे ने वाराणसी में गंगा आरती में हिस्सा लिया था और अहमदाबाद में रोड शो कर भारतीय संस्कृति के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-जापान के बीच ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ (Special Strategic and Global Partnership) को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में शिंजो आबे के ऐतिहासिक और दूरदर्शी योगदान को नमन किया। यह शिंजो आबे का ही विजन था जिसने ‘क्वाड’ (QUAD) गठबंधन की नींव रखी और एक “स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत” (Free and Open Indo-Pacific) क्षेत्र की अवधारणा को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रखा। भारत की महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना भी आबे के कार्यकाल में ही भारत-जापान मित्रता का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरी थी।

श्रीमती अकी आबे, जो स्वयं भारत की समृद्ध संस्कृति की बड़ी प्रशंसक रही हैं, ने अपने पति की स्मृतियों को सहेजने और उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म विभूषण’ (Padma Vibhushan) से सम्मानित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और भारत के लोगों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने दोनों देशों के युवाओं के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान (Cultural Exchange) को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अपने मित्रों को कभी नहीं भूलता। शिंजो आबे भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनके द्वारा बोए गए भारत-जापान मित्रता के बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुके हैं, जिसकी छांव में दोनों देश शांति, सुरक्षा और समृद्धि की ओर एक साथ कदम बढ़ा रहे हैं।