आंध्र प्रदेश का दौरा: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू विजयवाड़ा में करेंगी ‘राष्ट्रीय सरस मेले’ का भव्य उद्घाटन, ग्रामीण विकास को मिलेगी नई ताकत

अभिषेक सिंह
विजयवाड़ा/नई दिल्ली:
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू आज से आंध्र प्रदेश के दो दिवसीय महत्वपूर्ण आधिकारिक दौरे पर आ रही हैं। 14 से 15 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। इस यात्रा का सबसे मुख्य आकर्षण 15 अक्टूबर 2026 को विजयवाड़ा में आयोजित होने वाले ‘राष्ट्रीय सरस मेले’ (National SARAS Mela) में उनकी गरिमामयी भागीदारी और उसका उद्घाटन होगा, जो ग्रामीण महिला उद्यमियों के सशक्तिकरण का एक बड़ा मंच है।
ग्रामीण विकास और हस्तशिल्प का महासंगम
पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूचना के अनुसार, विजयवाड़ा में आयोजित होने वाला यह राष्ट्रीय सरस मेला केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। सरस (SARAS) यानी ‘सेल ऑफ आर्टिकल्स ऑफ रूरल आर्टिसंस सोसाइटी’ (Sale of Articles of Rural Artisans Society), भारत सरकार की एक बेहद महत्वाकांक्षी पहल है। इसका उद्देश्य देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के कारीगरों, शिल्पकारों और विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं को उनके द्वारा निर्मित उत्पादों को प्रदर्शित करने और सीधे शहरी बाजारों में बेचने के लिए एक बड़ा व बिचौलियों से मुक्त मंच प्रदान करना है।
महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की इस मेले में उपस्थिति ग्रामीण भारत के हुनर को राष्ट्र के शीर्ष स्तर पर मिलने वाले सम्मान को दर्शाती है। मेले में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सैकड़ों महिला स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण शिल्पकार हिस्सा ले रहे हैं। यहाँ पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र, जैविक खाद्य उत्पाद, मिट्टी के बर्तन, पारंपरिक आभूषण और विभिन्न राज्यों की अनूठी कलाकृतियों के सैकड़ों स्टॉल लगाए गए हैं।
राष्ट्रपति के इस दौरे को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार और विजयवाड़ा जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री और राज्यपाल 14 अक्टूबर को राष्ट्रपति के आगमन पर उनकी अगवानी करेंगे।
क्या है सरस मेले का महत्व?
आर्थिक विश्लेषकों और ग्रामीण विकास विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे राष्ट्रीय मेलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर गति मिलती है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं को न केवल अपने उत्पादों की उचित कीमत मिलती है, बल्कि उन्हें शहरी ग्राहकों की पसंद, आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल भुगतान और बाजार की मांग को समझने का व्यावहारिक अवसर भी प्राप्त होता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 15 अक्टूबर को मेले में ग्रामीण कारीगरों से संवाद भी कर सकती हैं, जिससे महिला उद्यमियों का मनोबल बढ़ेगा। अपने दो दिवसीय दौरे के अंत में राष्ट्रपति राज्य के कुछ अन्य महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में भी भाग ले सकती हैं, जिसके बाद वह नई दिल्ली के लिए रवाना होंगी।