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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुशासन से यूपी के विकास को दी नई गति: पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द

राघवेंद्र प्रताप सिंह

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने अपनी आत्मकथा के हिंदी संस्करण के विमोचन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और सुशासन की जमकर सराहना की है।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और राज्य में हो रहे अभूतपूर्व विकास कार्यों की खुले कंठ से प्रशंसा की है। अपनी आत्मकथा के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सुशासन के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास को एक नई गति और दिशा प्रदान की है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान राज्य सरकार ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को एक नई ऊर्जा दी है, जिससे राज्य में सकारात्मक बदलाव आया है। समारोह में उपस्थित अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कोविन्द ने इसे अपने लिए एक बेहद भावनात्मक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी कई मंचों से लोगों को संबोधित किया है, लेकिन आज चर्चा का मुख्य विषय उनका अपना जीवन है। उन्होंने गर्व के साथ स्मरण किया कि वह इसी प्रदेश की मिट्टी में जन्मे, पले-बढ़े, यहीं शिक्षा प्राप्त की और उत्तर प्रदेश ही उनकी कर्मभूमि भी बना।

पूर्व राष्ट्रपति ने राजनीति में अपने सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उनके द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनने का सबसे प्रमुख कारण पार्टी में ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना का होना है। उन्होंने कहा कि भाजपा में जातिवाद, क्षेत्रवाद और वंशवाद की संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर हमेशा समावेशी विकास पर बल दिया जाता है। अपनी बात को पुख्ता करते हुए उन्होंने उदाहरण दिया कि इसी पार्टी में एक साधारण शिक्षक के पुत्र अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री बने, कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने, गरीब परिवार में जन्मे योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे और एक चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। कोविन्द ने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग से आने वाले किसी व्यक्ति का राष्ट्रपति पद तक पहुंचना भारतीय गणतंत्र की सच्ची विजयगाथा को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनके जीवन पर गहरी छाप छोड़ी और उनसे ही राजनीति को सत्ता प्राप्त करने के बजाय राष्ट्रसेवा का माध्यम मानने की प्रेरणा मिली।

समारोह के दौरान अपने बचपन के संघर्षों को याद करते हुए रामनाथ कोविन्द काफी भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि कानपुर देहात के एक छोटे से गांव में उनका एक बेहद साधारण सा घर था, जिसकी छत बरसात के दिनों में टपकती थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में जब वे देश के राष्ट्रपति चुने गए, तो बचपन की वे संघर्षपूर्ण स्मृतियां फिर से उनके जेहन में ताजा हो गई थीं। उस समय उन्होंने कहा था कि देश के किसी न किसी गांव में आज भी कोई छोटा-सा रामनाथ टपकती छत के नीचे खड़ा होकर अपने बेहतर भविष्य के सपने जरूर देख रहा होगा। इसी संदर्भ में उन्होंने मोदी और योगी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि आज इन सरकारों ने करोड़ों गरीब परिवारों को पक्के मकान देकर उन्हें गरिमा और सुरक्षा का सुखद एहसास कराया है।

अपने पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि उनके पिता शिक्षा को जीवन बदलने का सबसे बड़ा माध्यम मानते थे और अपनी जमीन दान करने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया। गांव से मिले भाईचारे, संवेदना और बड़ों के सम्मान के संस्कार जीवनभर उनके साथ रहे। अपने संबोधन के अंत में पूर्व राष्ट्रपति ने आगामी प्रयागराज महाकुंभ 2025 का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस महाआयोजन ने पूरी दुनिया को भारत की आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता की अद्भुत शक्ति दिखाई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आने वाले दिनों में उनकी इस प्रेरणादायक आत्मकथा को देश की सभी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित किया जाएगा।