पशुपालन विभाग भर्ती घोटाला: पूर्व IAS योगेश कुमार गिरफ्तार, पूर्व मंत्री राज किशोर सिंह की फाइल शासन में लंबित

अभिषेक सिंह
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित पशुपालन विभाग भर्ती घोटाले में 12 साल बाद आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव और पूर्व आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद तत्कालीन पशुधन मंत्री राज किशोर सिंह की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।
उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के दौरान हुए एक बड़े और बहुचर्चित भर्ती घोटाले में पूरे 12 साल बाद जांच एजेंसियों का डंडा चला है। राज्य के पशुपालन विभाग में साल 2014 में हुए पशुधन प्रसार अधिकारियों के भर्ती घोटाले के सिलसिले में उत्तर प्रदेश आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। ईओडब्ल्यू की टीम ने तत्कालीन प्रमुख सचिव और 1980 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी योगेश कुमार को लखनऊ के गोमती नगर इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। एक पूर्व आईएएस अधिकारी की इस अचानक गिरफ्तारी से उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भारी हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि इस मामले में अब कई अन्य तत्कालीन अधिकारियों और राजनेताओं पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है।
यह पूरा मामला साल 2014 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल का है। उस दौरान प्रदेश के 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारियों के कुल 1,198 रिक्त पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इस भर्ती के लिए 2 फरवरी 2014 को परीक्षा आयोजित की गई थी। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद इसमें बड़े पैमाने पर धांधली, अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप सामने आने लगे थे। इस परीक्षा के आयोजन के समय आईएएस अधिकारी योगेश कुमार पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे और भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के कुछ समय बाद ही वह अपने पद से सेवानिवृत्त (रिटायर) हो गए थे।
इस बड़े घोटाले के सामने आने और लगातार उठ रहे सवालों के बाद, इस पूरे मामले की जांच उत्तर प्रदेश आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दी गई थी। ईओडब्ल्यू ने अपनी गहन जांच में इस भर्ती प्रक्रिया में कई बड़ी अनियमितताएं और गंभीर खामियां पाईं। लंबी जांच और सबूतों को इकट्ठा करने के बाद अब जाकर ईओडब्ल्यू ने 12 साल बाद इस मामले में पहली बड़ी गिरफ्तारी की है।
पूर्व आईएएस की इस गिरफ्तारी के बाद अब जांच की आंच उस समय के राजनेताओं तक भी पहुंचने लगी है। सपा की तत्कालीन सरकार में राज किशोर सिंह पशुधन मंत्री थे और उन्हीं के कार्यकाल में यह दागी भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। सूत्रों के अनुसार, पूर्व मंत्री राज किशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन (मुकदमा चलाने) की स्वीकृति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण फाइल अभी भी शासन स्तर पर लंबित बताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि शासन से हरी झंडी मिलते ही ईओडब्ल्यू पूर्व मंत्री राज किशोर सिंह पर भी अपना शिकंजा कस सकती है और उनकी मुश्किलें भी काफी हद तक बढ़ सकती हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हो गया है कि ईओडब्ल्यू इस 12 साल पुराने घोटाले को लेकर अब पूरी तरह से एक्शन मोड में है।