एअर इंडिया विमान के झूठे हाईजैक अलर्ट का रहस्य: एटीसी सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी या पायलट की गलती, जांच में जुटीं एजेंसियां

राघवेन्द्र प्रताप सिंह
एअर इंडिया की फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही उड़ान को हाईजैक के झूठे अलर्ट के कारण बुधवार को आपात स्थिति में जयपुर डायवर्ट करना पड़ा। मुंबई एटीसी को विमान से हाईजैक कोड 7500 मिला था, लेकिन पायलटों ने इसे भेजने से साफ इनकार किया है। अब एविएशन एजेंसियां इस रहस्य की जांच कर रही हैं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय विमानन क्षेत्र में बुधवार को उस समय भारी हड़कंप मच गया, जब एअर इंडिया (Air India) की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान में हाईजैक का गलत डर (झूठा अलर्ट) पैदा हो गया। इस बेहद संवेदनशील और गंभीर स्थिति को देखते हुए एअर इंडिया की फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही फ्लाइट को तुरंत जयपुर की ओर मोड़ना (डायवर्ट करना) पड़ा। इस रहस्यमयी घटना ने विमानन सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं और अब देश की प्रमुख एविएशन और सिक्योरिटी एजेंसियां इस पूरे मामले की बहुत ही बारीकी से जांच कर रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना एअर इंडिया के बोइंग 787-9 (Boeing 787-9) विमान में घटी, जिसमें लगभग 300 लोग (यात्री और क्रू मेंबर्स) सवार थे। यह विशाल विमान भारतीय एयरस्पेस में उस लंबे रास्ते से दाखिल हुआ था, जो आजकल पाकिस्तान के आसमान के भारतीय एयरलाइंस के लिए बंद होने की वजह से इस्तेमाल किया जा रहा है। उड़ान जब भारतीय हवाई क्षेत्र में थी, तभी मुंबई एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सिस्टम को इस विमान के ट्रांसपोंडर से अचानक ‘कोड 7500’ (Code 7500) प्राप्त हुआ। विमानन क्षेत्र में ट्रांसपोंडर कोड 7500 का मतलब बेहद गंभीर होता है, क्योंकि यह हाईजैकिंग (विमान अपहरण) या विमान में किसी भी प्रकार के गैर-कानूनी दखल को दर्शाने के लिए इस्तेमाल होने वाला अंतरराष्ट्रीय एविएशन कोड है।
इस हाईजैक कोड के मिलते ही एटीसी और सुरक्षा एजेंसियों में खलबली मच गई। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ी उलझन तब पैदा हुई जब विमान उड़ा रहे पायलटों ने इस तरह का कोई भी इमरजेंसी कोड भेजने से साफ इनकार कर दिया। एक्सपर्ट लोगों का कहना है कि जब एटीसी ने विमान से संपर्क साधा, तो पायलटों ने हाईजैक कोड भेजने की बात से इनकार किया और एटीसी को स्पष्ट रूप से बताया कि विमान में सब कुछ बिल्कुल ठीक और सामान्य है।
पायलटों के इस भरोसे के बावजूद, विमानन सुरक्षा में किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लिया जा सकता। इसलिए, विमानन सुरक्षा के तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हुए, विमान को तुरंत जयपुर हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया गया। जयपुर पहुंचने पर सुरक्षा कारणों से विमान को रनवे से अलग एक दूर के बे (आइसोलेशन बे) पर खड़ा किया गया। इसके बाद एहतियात के तौर पर विमान में सवार सभी लोगों और उनके सामान की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा बहुत अच्छी तरह से गहन जांच की गई, ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह से नकारा जा सके।
अब एविएशन एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पायलटों ने कोड 7500 नहीं भेजा, तो यह मुंबई एटीसी के सिस्टम में कैसे पहुंचा? अब इस बात की गहन जांच की जा रही है कि क्या यह एटीसी के सॉफ्टवेयर की कोई तकनीकी गड़बड़ी थी या फिर कॉकपिट में बैठे पायलटों से अनजाने में यह कोड दब गया था।