साई गांधीनगर में हिंदी पखवाड़े पर कवि सम्मेलन, खिलाड़ियों ने भी सुनाईं रचनाएं
गांधीनगर। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के नेताजी सुभाष पश्चिमी केंद्र, गांधीनगर में हिंदी पखवाड़ा-2026 के तहत आयोजित कवि सम्मेलन में खेल और साहित्य का संगम देखने को मिला। ‘हिंदी का मान; राष्ट्र का सम्मान’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में आमंत्रित कवियों के साथ प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मनोरंजन किया। हास्य, व्यंग्य, प्रेम और प्रेरणा से सजी कविताओं ने खिलाड़ियों के बीच साहित्यिक अभिरुचि को भी सामने रखा।
कार्यक्रम में साई गांधीनगर के क्षेत्रीय निदेशक प्रशांत सिंह, उप निदेशक अशोक खत्री, सहायक निदेशक ईशप्रीत, केंद्र के प्रशिक्षक और बड़ी संख्या में खिलाड़ी मौजूद रहे। मंच संचालन अशोक खत्री ने किया।
खिलाड़ियों की रचनाओं ने बांधा समां

कवि सम्मेलन में केंद्र के प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। एथलेटिक्स कोच आयुष ने प्रेम और प्रीत पर आधारित कविताओं का पाठ किया, जबकि पैरा-पावरलिफ्टिंग खिलाड़ी गुलफाम ने परीक्षा के तनाव और परीक्षा कक्ष के अनुभवों को हास्य के अंदाज में पेश किया। उनकी कविताओं ने सभागार में ठहाके लगवाए और तालियां बटोरीं।
गुलफाम ने परीक्षा में देर से पहुंचने और प्रश्नपत्र को लेकर विद्यार्थियों की मनोदशा को अपनी कविता के जरिए कुछ इस तरह बयां किया— “द्वार पर चपरासी ने बतलाया, वो तुम पाँच मिनट लेट। द्वार पर चपरासी ने बतलाया, मैं मेल ट्रेन की तरह कमरे के भीतर आया।”
वहीं, परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने की चिंता पर उनकी पंक्तियों ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया— “ये 100 नंबर का पर्चा था, मुझे दो की भी आस नहीं। अब तो चाहे दुनिया पलटे, हो सकता मैं पास नहीं।”
सूरज राय ‘सूरज’ और रामायण धर द्विवेदी की कविताओं ने जीता दिल
कार्यक्रम में आमंत्रित कवियों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को प्रभावित किया। सुप्रसिद्ध शायर एवं कवि सूरज राय ‘सूरज’ ने मानवीय भावनाओं और रिश्तों की गहराई को बयां करती रचनाएं सुनाईं। उनकी पंक्तियां— “चेहरे पर मुस्कान दिलों में लेकर खाई बैठे हैं, करके सारे लोग हिसाब-ए-पाई-पाई बैठे हैं…” को श्रोताओं की खूब सराहना मिली।
युवा हिंदी कवि एवं गीतकार रामायण धर द्विवेदी ने भगवान श्रीराम, रामायण और जीवन में सद्गुणों के महत्व पर आधारित ओजपूर्ण कविताओं से माहौल को प्रेरणादायी बनाया। प्रेम, सदाचार और मर्यादा का संदेश देती उनकी रचना की पंक्तियां थीं—
“प्रेम का बीज अब जब एक अंकुर बने,
मन थरा सी पतित सोच भंगुर बने।
सद्गुणों राम बनकर विराजो यहां,
अब हृदय हर किसी का अवधपुर बने।।”
रामायण से प्रेरित उनकी एक अन्य रचना ने भी श्रोताओं का ध्यान खींचा—
“नजर थी या की बारिश की झड़ी थी,
चुनौती बारहा स्तर पर खड़ी थी।
कोई रावण मगर जीता ना मुझसे,
वजह ये मैंने रामायण पढ़ी थी।।”
खेलों के साथ साहित्यिक गतिविधियों पर जोर
आमंत्रित कवियों के साथ प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों की सहभागिता ने आयोजन को खास बनाया। कार्यक्रम के माध्यम से हिंदी भाषा की साहित्यिक समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित करने के साथ खेलों से जुड़े लोगों के सर्वांगीण विकास में साहित्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की भूमिका भी सामने आई।
कवि सम्मेलन का समापन उल्लासपूर्ण माहौल में हुआ। कविताओं, हास्य और प्रेरणादायी संदेशों से सजी इस साहित्यिक संध्या में खिलाड़ियों और अन्य उपस्थित लोगों ने हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति अपनी रुचि और सराहना व्यक्त की।