‘कहां गई मुमताज बेगम’, गुवाहाटी HC का केंद्र और राज्य सरकार को आदेश; बांग्लादेश भेजी गई महिला को ढूंढो

असम के नगांव जिले से कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन कर बांग्लादेश भेजी गई महिला मुमताज बेगम के लापता होने पर गुवाहाटी हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने विदेश मंत्रालय और राज्य सरकार को महिला का पता लगाने और 6 नवंबर से पहले हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है
सरिता त्रिपाठी
गुवाहाटी। असम से निर्वासन (डिपोर्टेशन) के नियमों को ताक पर रखकर बांग्लादेश भेजी गई महिला मुमताज बेगम के लापता होने के मामले में गुवाहाटी हाई कोर्ट (Gauhati HC) ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार (विदेश मंत्रालय) और असम की राज्य सरकार को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे बांग्लादेश भेजी गई मुमताज बेगम का हर हाल में पता लगाएं और उन्हें वापस भारत लाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों और विदेशी न्यायाधिकरण (Foreigners Tribunal) से पूरी रिपोर्ट तलब की है और आगामी 6 नवंबर की सुनवाई से पहले अदालत में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह पूरा मामला असम के नगांव जिले के जुरिया निवासी मुमताज बेगम से जुड़ा है, जिनके पति मुजम्मेल हक ने अपनी पत्नी का पता लगाने के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दायर की थी। अदालती कार्यवाही में दर्ज विवरण के अनुसार, वर्ष 2019 में नगांव के विदेशी न्यायाधिकरण ने मुमताज बेगम को विदेशी नागरिक घोषित कर दिया था। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने मामले पर पुनर्विचार का निर्देश दिया था। हालांकि, 30 मई 2026 को जब मुमताज बेगम दोबारा न्यायाधिकरण के समक्ष पेश हुईं, तो उनके वकील के वहां से जाने के तुरंत बाद पुलिस ने उन्हें परिसर से ही गिरफ्तार कर लिया और गोलपाड़ा जिले के मटिया स्थित डिटेंशन कैंप में भेज दिया।
अदालत में पेश किए गए तथ्यों के मुताबिक, मुमताज बेगम को अपने बचाव में कानूनी उपाय अपनाने का उचित अवसर दिए बिना और उनके पति या परिवार को कोई स्पष्ट सूचना दिए बगैर ही कार्रवाई की गई। 3 जून को उन्हें श्रीभूमि के होल्डिंग सेंटर ले जाया गया और 13 जून 2026 को सीमा सुरक्षा बल (BSF) के हवाले कर दिया गया। बीएसएफ ने अदालत को बताया कि 14 जून 2026 की तड़के कछार के कलैनचेरा इलाके से उन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराकर बांग्लादेश भेज दिया गया। सीमा पार भेजे जाने के बाद से ही मुमताज बेगम का कोई अता-पता नहीं है और उनका परिवार पिछले कई महीनों से उनकी तलाश में भटक रहा है। इसी तरह नगांव की एक अन्य महिला जहांआरा बेगम भी समान परिस्थितियों में लापता बताई गई हैं, जिनके मामले की सुनवाई भी कोर्ट ने इसके साथ की है।
इससे पहले सितंबर 2026 में जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस सुष्मिता फुकन खाउंड की खंडपीठ ने निर्वासन की प्रक्रिया में संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने मुमताज बेगम को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अधिकार से वंचित करने पर असम सरकार को उनके पति मुजम्मेल हक को 2 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश भी दिया था। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद बांग्लादेश के गृह मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन ने भी सिलहट व आसपास के इलाकों में मुमताज की तलाश शुरू की और 22 सितंबर को प्रमुख बंगाली अखबारों में उनकी तस्वीर भी प्रकाशित की गई, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। महिला के बेटे मोमरूज अली ने भी सरकार से अपनी मां को जीवित ढूंढने की भावुक अपील की है। अब सबकी नजरें 6 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।