विनेश व बजरंग को छूट के विरोध में पहलवान अंतिम और सुजीत दिल्ली हाईकोर्ट में
नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट में पहलवान अंतिम पंघाल और सुजीत कलकल ने एशियाई खेल के ट्रायल के लिए विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया को दी गई छूट के फैसले को चुनौती दी।
दोनों पहलवानों ने महाद्वीपीय टूर्नामेंट के लिए चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता की मांग की है। याचिका में मांग की गई है कि ट्रायल निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। किसी भी पहलवान को कोई छूट नहीं दी जानी चाहिए। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होनी चाहिए।

याचिका में दलील दी गई है कि इन पहलवानों ने कहा था कि उनकी लड़ाई न्याय और जूनियर पहलवानों के हित के लिए है और अब वे जूनियर पहलवानों को किनारे करना चाहते हैं। इसलिए हमें इस फैसले के खिलाफ कोर्ट का रुख करना पड़ा। याचिका में बोला गया कि विनेश फोगाट व बजरंग पूनिया को ट्रायल के बगैर सीधा एशियन गेम्स में शामिल होने की अनुमति देना न्यायसंगत नहीं है।
दोनों पहलवानों की संयुक्त याचिका दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा के समक्ष पेश की गई। गुरुवार को मामले की सुनवाई होगी।
याचिका उनके वकील ऋषिकेश बरुआ और अक्षय कुमार ने दायर की, जिसमें मांग की गई कि आईओए की तदर्थ समिति द्वारा दो वर्गों (पुरुष फ्रीस्टाइल 65 किग्रा और महिलाओं की 53 किग्रा) के संदर्भ में जारी किए गए निर्देशों को खारिज कर बजरंग और विनेश को दी गई छूट नामंजूर की जाए।
अंतिम पंघाल का बोलना था कि वह विनेश के साथ कुश्ती के लिए तैयार हैं। उन्हें भरोसा है कि वह विनेश को हरा देंगी। याचिका में बोला गया है कि विनेश फोगाट ने पिछले एक वर्ष से पहलवानी का अभ्यास नहीं किया है।
बावजूद इसके इन सभी तथ्यों को नजरअंदाज कर उन्हें बगैर ट्रायल के एशियन गेम्स में जाने की अनुमति दे दी गई है। सुजीत ने कहा कि 65 किग्रा वर्ग में देश में कम से पांच-छह पहलवान है, जो बजरंग को हराने में सक्षम है।