दिल्ली हाईकोर्ट ने डब्ल्यूएफआई को जवाब दाखिल करने को बोला
बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट को एशियाई खेल में भारतीय कुश्ती महासंघ की एडहॉक समिति ने सीधी एंट्री दी है। इसे लेकर पहलवानों ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने समिति को बजरंग और विनेश को एशियाई खेल के ट्रायल से दी गई छूट का आधार बताने को बोला।
जस्टिस ने मामले को शुक्रवार को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए बोला, ‘अगर यह (चयन का आधार) उचित, निष्पक्ष और तर्कसंगत है, तो यह मामले की सुनवाई बंद कर दी जाएगी।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने डब्ल्यूएफआई के एडहॉक पैनल के वकील को यह बताने के लिए बोला कि, फोगाट और पूनिया के अच्छे खिलाड़ी होने के अलावा चयन का आधार क्या था क्योंकि याचिकाकर्ताओं का पूरा मामला यही है कि चयन से पहले किसी भी तरह का ट्रायल होना चाहिए।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने अंडर -20 विश्व विजेता अंतिम पंघाल और अंडर-23 एशियाई चैंपियन सुजीत कलकल की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए खेल निकाय को दिन में अपना जवाब दाखिल करने के लिए बोला।
कोर्ट ने कहा, ‘याचिकाकर्ताओं को उन दो पहलवानों की योग्यता पर संदेह नहीं है जिन्हें आपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना है। लेकिन वे जो कह रहे हैं वह यह है कि केवल पिछला प्रदर्शन ही चयन का आधार नहीं हो सकता।
उनका पूछना है, ‘इस तथ्य के अलावा लोगों को चुनने का आधार क्या है कि वे अच्छे खिलाड़ी हैं, क्या आपने किसी प्रकार की चयन प्रक्रिया अपनाई है?’ केंद्र की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को सूचित किया कि चयन नीति स्वयं कुछ श्रेणी के प्लेयर्स को छूट प्रदान करती है।
डब्ल्यूएफआई दिशानिर्देशों के मुताबिक़, सभी भार वर्गों में चयन ट्रायल अनिवार्य है। चयन समिति को मुख्य कोच/विदेशी विशेषज्ञ की अनुशंसा के बिना ट्रायल के ओलंपिक/विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेताओं जैसे प्रतिष्ठित प्लेयर्स का चयन करने का विवेकाधिकार होगा। याचिकाकर्ताओं के वकील ने बोला कि फोगाट और पूनिया का चयन छूट नीति के अनुरूप नहीं है।
फोगाट (53 किग्रा) और पूनिया (65 किग्रा) को मंगलवार को भारतीय ओलंपिक संघ की एडहॉक समिति द्वारा एशियाई खेल के लिए सीधे प्रवेश मिला है, अन्य पहलवानों को 22 और 23 जुलाई को ट्रायल के से भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करनी होगी। पंघाल और कलकल ने छूट को चुनौती दी।