आईओए मुख्यालय पहुंचे जूनियर पहलवान व उनके रिश्तेदार, की ये मांग
भारतीय ओलंपिक संघ के मुख्यालय पर कई जूनियर पहलवान, उनके माता-पिता और कोच पहुंचे। इन लोगों ने एशियाई खेल के ट्रायल्स से विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया को मिली छूट वापस लेने की मांग की। जूनियर पहलवानों को विश्व चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेल की रजत पदक विजेता अंशु मलिक का समर्थन मिला।
मौजूदा अंडर-20 विश्व विजेता अंतिम पंघाल और अंडर 23 एशियाई चैंपियन सुजीत कलकल ने तदर्थ समिति के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अनुचित और अन्यायपूर्ण करार दिया था। अंतिम पंघाल और सुजीत कलकल का दावा था कि, अगर ट्रायल्स में उनका मैच बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट से होता है तो वे उन्हें हराने में सक्षम हैं।
हालांकि, ये दोनों प्रदर्शन करने के लिए ओलंपिक भवन नहीं पहुंचे थे। पहलवानों के परिजन सहित लगभग 150 लोगों ने आईओए की अध्यक्ष पीटी उषा और तदर्थ समिति के प्रमुख भूपेंदर सिंह बाजवा से मिलने की मांग की।

उदीयमान खिलाड़ी अंतिम पंघाल के कोच विकास भारद्वाज ने एक समाचार एजेंसी से बोला, ‘हम सभी आईओए के शीर्ष पदाधिकारियों से मिलना चाहते हैं। हम किसी भी तरह के पक्षपातपूर्ण फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे। यह गलत है। हम यहां तदर्थ समिति से यह आग्रह करने आए हैं कि वह बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट को दी गई छूट वापस ले।
भूपेंदर सिंह बाजवा की अगुवाई वाली आईओए की तदर्थ समिति ने ट्रायल्स के मानदंड घोषित करते हुए कहा था कि सभी भार वर्गों में ट्रायल्स होंगे, लेकिन उन्होंने पुरुषों के फ्रीस्टाइल 65 किग्रा और महिलाओं के 53 किग्रा भार वर्ग में पहले ही पहलवानों का चयन कर लिया है।
अंतिम पंघाल और सुजीत कलकल ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करके बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट को दी गई छूट को वापस लेने के लिए आईओए को निर्देश देने की मांग की है। बता दें कि अंशु मलिक ने जूनियर पहलवानों के समर्थन में ट्वीट किया।
उन्होंने लिखा, ‘एक एथलीट का सबसे बड़ा सपना ओलंपिक और एशियाई खेल जैसे टूर्नामेंट में पदक जीतकर देशवासियों को गौरवान्वित करने का होता है। अगर इन प्लेयर्स के अधिकार ही छीन लिए जाए। महिलाओं की 57 किग्रा वर्ग में स्पर्धा करने वाली अंशु ने आगे लिखा, ‘जूनियर प्लेयर्स का ट्रायल की मांग करना उचित है। यह उनका अधिकार है। मैं जूनियर खिलाड़ियों की मांग का समर्थन करती हूं।