नवाबों के शहर ने किया वर्ल्ड कप की ट्रॉफी का दीदार
लखनऊ : अक्टूबर-नवंबर में होने वाले वनडे वर्ल्डकप की ट्रॉफी का अनावरण लखनऊ के अटल इकाना स्टेडियम में हुआ। ये यूपी के लिए भी गौरवशाली पल है कि लखनऊ पहली बार इस टूर्नामेंट के पांच मुकाबलों की मेजबानी कर रहा है। इन पांच मुकाबलों के आयोजनों को कामयाब बनाने के लिए सभी तैयारियां शुरू हो गई है।
वहीं वर्ल्ड कप ट्राफी अपने लखनऊ टूर के चरण में शुक्रवार को लखनऊ पहुंची। यह ट्राफी तीन दिन लखनऊ में रहेगी। हालांकि आम नागरिक इस ट्राफी का दीदार 22 और 23 जुलाई को लुलु मॉल में सुबह 10 बजे से रात 10:30 बजे तक कर सकेंगे। यह ट्रॉफी मॉल के फर्स्ट फ्लोर पर रखी जाएगी।
इस अवसर पर यूपीसीए के निदेशक युद्धवीर सिंह ने बताया कि वर्ल्ड कप के इन पांच मैचों की मेजबानी के लिए लखनऊ सहित पूरा यूपी उत्साहित है। इसके आयोजन के लिए तैयारियों को जल्द ही अमली जामा पहनाया जाएगा। उन्होंने इसके साथ ये भी कहा कि अगले कुछ दिनों में ही वर्ल्ड कप के टिकटों की ऑनलाइन बिक्री शुरू होगी।
उन्होंने ये भी कहा कि अगर यूपीसीए को टेस्ट मैचों की मेजबानी मिली तो इसका आयोजन कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में किया जाएगा। इस अवसर पर इकाना स्पोर्ट्स सिटी के मैनेजिंग डायरेक्टर उदय सिन्हा और यूपीसीए के सचिव अरविंद श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।

बताते चले कि इस बार वनडे वर्ल्डकप की मेजबानी भारत कर रहा है जिसके मैच लखनऊ सहित देश के नौ शहरों में खेले जाएंगे। इसमें लखनऊ का इकाना स्टेडियम टीम इंडिया व इंग्लैंड के बीच मुकाबलों सहित पांच मैचों की मेजबानी करेगा।
इससे पहले टीम इंडिया ने वर्ष 2011 में विश्न कप की ट्राफी जीती थी जबकि विश्व कप 2015 और 2019 में टीम सेमीफाइनल में हार गयी थी।
वहीं इस बार भारत को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। दरअसल अपने देश में आयोजन करा वर्ल्डकप जीतने वाला भारत पहला देश बना था। को जीत मिली थी।

इसकी शुरुआत साल 2011 में भारत से हुई थी। उससे पहले कभी भी आयोजक देश विश्वकप नहीं जीत पाया था। उसके बाद से लगातार मेजबान देश ही वर्ल्डकप जीत रहे है। यानि 2015 में ऑस्ट्रेलिया और 2019 में इंग्लैंड चैंपियन बने थे।
वहीं उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सीईओ अंकित चटर्जी ने बताया कि लखनऊ में वर्ल्ड कप ट्रॉफी तीन दिन रहेगी। इससे पूर्व 13 साल पहले 14 अक्तूबर 2010 को विश्वकप ट्रॉफी को लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में लाया गया था।
उस समय के तत्कालीन मेयर दिनेश शर्मा ने विश्वकप ट्रॉफी की अगवानी की। उस समय ट्रॉफी का दीदार करने वालों का जमावड़ा लग गया था। मौके पर केडी सिंह बाबू स्टेडियम में शुभकामनाएं संदेश देने के लिए एक बैनर भी लगाया गया था।
सोने चांदी से बनी है ट्रॉफी, पांचवी बार बनी ट्राफी हुई स्थायी
वर्तमान में वर्ल्ड कप विजेता को दी जाने वाली ट्रॉफी पॉल मार्समैन ने डिजायन किया था। इसका निर्माण गैरार्ड एण्ड कंपनी ने लन्दन में किया। इस ट्रॉफी का वजन करीब 11 किलोग्राम है। इसमें सोने और चांदी से बना एक ग्लोब है। यह ग्लोब चांदी के तीन कॉलम पर टिका है। ये कॉलम स्टम्प जैसे हैं। साठ सेंटीमीटर ऊंची इस ट्रॉफी के आधार पर पिछले विजेताओं के नाम लिखे हुए होते हैं।
विश्वकप क्रिकेट के विजेता को दी जाने वाली ट्रॉफी का डिजाइन और नाम कई बार बदला पर 1999 विश्वकप से ट्रॉफी को स्थायी रुप दिया गया। वर्तमान में दी जाने वाली ट्रॉफी का डिजायन 1999 में ही तैयार किया गया था। 1975, 79 और 83 में हुए विश्वकप में विजेता को दी जाने वाली ट्रॉफी का नाम प्रूडेंशियल कप था। साल 83 में भारत ने यही ट्रॉफी जीती थी।
इसके बाद 1987 में ट्रॉफी का डिजायन फिर बदला। इसको नाम दिया गया था ‘रिलायंस कप’। साल 1992 में ट्रॉफी ‘बेंसन एण्ड हेजेज कप’ था तो 1996 में इसे ‘विल्स वर्ल्ड कप कप’ नाम दिया गया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ने ट्रॉफी के साथ किसी का नाम जोड़ने का फैसला किया। इसके बाद उसने ट्रॉफी का नया डिजायन तैयार किया और नाम रखा ‘आईसीसी वर्ल्ड कप’। तब से ही ट्रॉफी विश्व कप विजेता को प्रदान की जाती है।