डी गुकेश अब सबसे बेहतर रैंकिंग वाले शतरंज खिलाड़ी, विश्वनाथन आनंद को पीछे छोड़ा
17 वर्ष के ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने भारत के महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद की जगह ले ली है। डी गुकेश सबसे बेहतरीन रैंकिंग वाले भारतीय शतरंज खिलाड़ी बन गए है।
गुकेश के पिता पेशे से एक डाक्टर है, जबकि उनकी मां माइक्रोबायोलोजिस्ट है। गुकेश वर्ष 2015 में एशियाई स्कूल शतरंज चैंपियनशिप में अंडर-9 के खिताब जीतने के साथ कैंडिडेट मास्टर बने थे।
गुकेश अभी तक एशियाई यूथ चैंपियनशिप में 5 गोल्ड जीत चुके है। साल 2019 में उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया जब वो दिसंबर में भारत के सबसे युवा और वर्ल्ड के दूसरे युवा ग्रैंडमास्टर बने। गुकेश के नाम 2758 रेटिंग अंक है, आनंद 2754 रेटिंग के साथ नौवें नंबर पर है। डी गुकेश का पूरा नाम डोमाराजू गुकेश है।

7 मई 2006 को जन्मे इस खिलाड़ी ने 7 वर्ष के थे जब उन्होंने शतरंज खेलना सीखा था, विश्वनाथन आनंद के शहर चेन्नई से आने वाले गुकेश ने शतरंज खेलना सबसे पहले स्कूल में शुरू किया था।
स्कूल में गुकेश के पहले कोच, श्री भास्कर थे। विजयानंद, गुकेश के कोच बने। इसके बाद युवा शतरंज खिलाड़ी को इंटरनेशनल स्तर पर लगातार सफलता मिलनी शुरू हो गई।
गुकेश ने रैंकिंग के मामले में विश्वनाथन आनंद से आगे निकलते हुए अपनी जगह सबसे बेहतरीन रैंकिंग वाले भारतीय शतरंज खिलाड़ी में बना ली है।
वह विश्व में आठवे नबंर पर पहुंच गए है। ऐसा पहली बार हुआ है जब उन्होंने सूची के अंदर टाप 10 में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है। फिडे की जारी सिंतबर रैंकिंग के अनुसार, गुकेश के नाम 2758 रेटिंग अंक है वहीं दूसरी ओर आनंद 2754 रेटिंग के साथ नौवें नंबर पर है।
गुकेश 11 साल, 9 महीने और 9 दिन की उम्र में ही इंटरनेशनल मास्टर बन गए, इसके बाद उन्होंने खेल के इतिहास में सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बनने का अपना सफर शुरू किया था।
गुकेश की पहली बड़ी उपलब्धि जनवरी 2019 में आई, जब उन्होंने 12 साल, 7 महीने और 17 दिन की उम्र में ग्रैंडमास्टर का खिताब जीतकर इतिहास बना दिया था। वे जीएम सर्गेई कारजाकिन के रिकार्ड को तोड़ने से केवल 17 दिनों से चूक गए थे।
इसके अलावा हाल ही में वर्ष 2023 में उन्होंने जूनियर स्पीड शतरंज चैंपियनशिप में भी जीत दर्ज की थी। उन्होंने खिताब जीतने के लिए आइएम एमिन ओहानियन, जीएम प्रणव वी और जीएम रौनक साधवानी हराकर कमाल कर दिया था।
जुलाई में, उन्होंने 2750 रेटिंग को पार कर लिया और वो ऐसा करने वाले इतिहास के सबसे कम उम्र के शतरंज खिलाड़ी बन गए।