एशियाई खेल : 4×400 मीटर रिले में पुरुष टीम ने जीता स्वर्ण, महिलाओं को रजत पदक
एशियाई खेल में अनस मुहम्मद याहिया, अमोज जैकब, मुहम्मद अजमल वरियाथोडी और राजेश रमेश की भारतीय चौकड़ी ने पुरुषों की 4×400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक अपने नाम किया.
विथ्या रामराज, ऐश्वर्या मिश्रा, प्राची और सुभा वेंकटेशन की महिला टीम ने 4×400 मीटर रिले में रजत पदक जीता. पुरुष इवेंट में भारत ने हीट 1 में कतर, जापान और इराक से आगे सबसे तेज 3:03.81 मिनट का समय निकालकर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया.
बेल्जियम में हाल ही में खत्म हुई एथलेटिक्स विश्व चैंपियंस में जैकब, अनस, राजेश रमेश और मुहम्मद अजमल वरियाथोडी के क्वार्टर द्वारा हासिल किए गए इवेंट में भारत के पास एरिया रिकॉर्ड भी है.

टीम ने उस स्पर्धा में आखिरी विजेता यूएसए के पीछे फाइनल के लिए क्वालीफाई करने के लिए 2:59.05 मिनट का समय लिया. भारतीय महिला 4×400 मीटर रिले टीम 2002 से एशियाई खेल में स्वर्ण जीत रही है.
भारतीय महिला 4×400 मीटर रिले टीम 1982 के दिल्ली एशियाड के बाद से इस स्पर्धा में पदक जीत रही है. भारतीय रिले टीम का हिस्सा रहीं विथ्या रामराज ने एशियाई खेल के दसवें दिन यानि कि मंगलवार को 400 मीटर बाधा दौड़ में कांस्य पदक जीता था.
पैदल चाल स्पर्धा में सोनभद्र के रामबाबू व मंजू रानी ने जीता कांस्य पदक
एशियन गेम्स में 35 किमी की पैदल चाल स्पर्धा (मिश्रित टीम) में सोनभद्र के रामबाबू और मंजू रानी की जोड़ी ने कांस्य पदक जीता। पैदल चाल की 35 किमी मिक्स्ड टीम स्पर्धा में सोनभद्र के रामबाबू ने मंजू रानी के साथ कांस्य पदक जीता है।
रामबाबू के कामयाबी की खबर सुनते ही जिले में खुशी छा गई। मजदूर किसान के बेटे रामबाबू ने इससे पहले राष्ट्रीय खेल में नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था।
बहुअरा गांव के भैरवागांधी टोले में एक छोटे से खपरैल के मकान में रहने वाले रामबाबू पिछले वर्ष अचानक से तब चर्चा में आए, जब उन्होंने गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेल की पैदल चाल स्पर्धा में नए राष्ट्रीय रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया था। उन्होंने 35 किमी की दूरी महज 2 घंटे 36 मिनट और 34 सेकेंड में पूरी की थी।

इससे पहले यह रिकार्ड हरियाणा के मुहम्मद जुनैद के नाम था। राष्ट्रीय खेल में जुनैद को हराकर ही रामबाबू ने स्वर्ण पदक जीता था। 15 फरवरी को रांची में आयोजित राष्ट्रीय पैदल चाल चैंपियनशिप में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2 घंटे 31 मिनट 36 सेकेंड का समय निकाला।
25 मार्च को स्लोवाकिया में अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में प्रतिभाग करते हुए 2 घंटे 29 मिनट 56 सेकेंड में दूरी तय की। रामबाबू ने मधुपुर में पढ़ाई के दौरान ही एथलीट बनने का सपना देखा था।
इसे पूरा करने के लिए उन्होंने गांव के कच्चे चकरोड पर अभ्यास शुरू कर किया। पिता छोटेलाल कृषि मजदूर के रूप में काम करते हुए बेटे को हरसंभव प्रोत्साहित करते रहे। कठिन परिश्रम से गांव के पगडंडी से निकल कर रामबाबू राष्ट्रीय फलक पर छाने में कामयाबी पाई।