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आईसीसी के इस फैसले पर राहुल द्रविड़ हुए नाराज, जाने पूरा मामला

वनडे वर्ल्ड कप की कुछ पिचों को आईसीसी द्वारा ‘औसत’ की रेटिंग दिए जाने से भारत के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ सहमत नहीं है और इस पूर्व खिलाड़ी ने बोला कि सिर्फ अधिक रन बनना ही पिचों को रेटिंग दिए जाने की पात्रता नहीं हो सकती।

आईसीसी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की मेजबानी करने वाले चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम और अहमदाबाद में पाकिस्तान के खिलाफ मैच की मेजबानी करने वाले अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच को ‘औसत’ रेटिंग दी है।

द्रविड़ ने कहा कि वह एक टूर्नामेंट में विविधता देखना चाहते है और सिर्फ रन बनने के आधार पर पिच को रेटिंग नहीं दी जा सकती। द्रविड़ ने न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच की पूर्व संध्या पर बोला, ‘मैं निश्चित रूप से उन दो विकेटों के लिए दी गई औसत रेटिंग से सम्मानपूर्वक असहमत रहूंगा।

मुझे लगता है कि वे अच्छे विकेट थे। यदि आप केवल 350 रन देखना चाहते है और केवल उन्हीं विकेटों को अच्छा मानते है, तो मैं इससे असहमत हूं।

द्रविड़ ने कहा कि अगर सिर्फ चौके और छक्के देखने है तो फिर गेंदबाजों की मैच में क्या भूमिका है। उन्होंने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो दिल्ली या पुणे में शायद 350 रन से अधिक के विकेट भी है।

केवल वे ही अच्छे विकेट है तो फिर गेंदबाज यहां क्यों है? आखिर स्पिनर क्यों है? यदि आप सभी चाहते है कि स्पिनर आएं और 10 ओवर में 60 रन देकर चले जाएं, ताकि आप चौके और छक्के देख सकें और एक गेंद स्पिन हो या दो गेंद स्पिन हो और आप इसे औसत रेटिंग दें।

उन्होंने कहा, ‘मैं इससे असहमत हूं क्योंकि मुझे लगता है कि हमें सभी कौशल पर ध्यान देना चाहिए, बीच में स्ट्राइक रोटेट करने की क्षमता। जडेजा की स्तरीय गेंदबाजी या (मिशेल) सेंटनर को गेंदबाजी करते हुए देखना या (एडम) जम्पा को गेंदबाजी करते हुए देखने या केन विलियमसन को बीच के ओवरों में स्ट्राइक रोटेट करते हुए देखना।

विराट और राहुल ने जिस तरह से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बल्लेबाजी की। वे कौशल भी है। उनको भी सामने आकर दिखाने और प्रदर्शित करने की जरूरत है।

भारतीय कोच ने कहा, ‘कुछ विकेटों पर जिन पर हम खेले, दिल्ली और पुणे में बीच के ओवरों में स्ट्राइक रोटेट करना कोई कठिन कौशल नहीं था। द्रविड़ ने अपनी बात को साबित करने के लिए कुछ उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको एक उदाहरण देता हूं।

मुझे नहीं पता कि उन विकेटों के लिए क्या रेटिंग थी, हमने ऑस्ट्रेलिया में टी20 विश्व कप खेला था। पर्थ में हमने 138 रन का विकेट देखा।

भारत दक्षिण अफ्रीका से खेलता है और प्रत्येक गेंद सीम और स्विंग करती है। वह एक टी20 मैच था। मुझे नहीं पता कि उसे क्या रेटिंग दी गई। मुझे आशा है कि उसे भी औसत रेटिंग दी गई होगी।

उन्होंने कहा, ”विश्व टी20 फाइनल में पाकिस्तान ने इंग्लैंड से फिर खेला और टी20 मैच में 130 रन बने। मैं इसके बारे में शिकायत नहीं कर रहा हूं। मुझे लगता है कि यह अच्छा है, यह बहुत अच्छा है।

पर्थ का वह विकेट अच्छा था। इसमें विभिन्न कौशल को चुनौती मिली। इसमें विभिन्न कौशल को प्रदर्शित किया गया। और मैं यह तब भी कह रहा हूं, हम वे मैच हार चुके है।

इसमें कोई समस्या नहीं है। कभी-कभी विकेट थोड़ा टर्न करेंगे, कभी-कभी वे थोड़ा सीम करेंगे, वे थोड़ा स्विंग करेंगे, वे थोड़ा उछाल लेंगे। हम 350 रन में लगने वाले छक्कों और चौकों को ही अच्छे विकेट के रूप में देखना चाहते है तो मैं इससे असहमत हूं।

द्रविड़ ने कहा कि वह टूर्नामेंट में विविधता देखना चाहते है और कम रन बनने का मतलब यह नहीं है कि विकेट अच्छा नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘मैं सिर्फ एक टूर्नामेंट में विविधता देखना चाहता हूं। मेरा मतलब है कि कभी कभी अच्छे विकेट होंगे।

कभी-कभी 350 का स्कोर होगा और ऐसे मैच होंगे जिनमें काफी रन बनेंगे। कभी-कभी ऐसे विकेट होते है जहां गेंद घूमती है, स्पिनरों को मौका मिलता है।

अन्य विकेट भी होंगे जहां गेंद थोड़ा सीम हो सकती है। आपके पास एक लंबा टूर्नामेंट है, आप भारत में खेल रहे है, देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग विकेट होंगे, अलग-अलग चुनौतियां होंगी। जो टीमें उन सभी चुनौतियों का सामना करने और उससे निपटने में सक्षम है, अंततः सफल होंगी।