Trending

मोहम्मद शमी की कड़ी मेहनत के पीछे कोच बदरुद्दीन का बड़ा योगदान

कीवी टीम के खिलाफ वनडे वर्ल्ड कप में मोहम्मद शमी ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पहले सेमीफाइनल मैच में 7 विकेट झटके। इस जीत के साथ टीम इंडिया फाइनल में एंट्री ले ली है।

मोहम्मद शमी ने खतरनाक दिख रहे केन विलियमसन और टॉम लैथम को आउट करके भारत को मैच में वापस लाया। बता दें कि शमी वर्ल्ड कप में अब तक 10 मैचों में 23 विकेट झटक चुके हैं। उनकी इस सफलता में उनकी कड़ी मेहनत नहीं बल्कि उनके कुछ बदरुद्दीन का भी बड़ा योगदान है।

मोहम्मद शमी 13 से 14 साल की उम्र में रोजाना अमरोहा से 25 किलोमीटर दूर मुरादाबाद के सोनकपुर स्टेडियम में बदरुद्दीन से कोचिंग लेने जाते थे। बदरुद्दीन ने एक चैनल से बात करते हुए कहा, “शमी के पिता उन्हें 2002 में सोनकपुर स्टेडियम लेकर आए थे।

उनके पिता ने बोला कि उन्होंने अमरोहा में अपनी गेंदबाजी से तहलका मचाया था। मैंने शमी को वार्मअप कराया और 30 मिनट तक गेंदबाजी कराई।

खेल के पहले मिनट में उन्होंने जो गेंद फेंकी और 30वें मिनट में जो गेंद फेंकी उनमें कोई अंतर नहीं था। उन्होंने 30वें मिनट में भी उसी जोश के साथ गेंद फेंकी। तभी से मुझे उनके जुनून का पता चल गया।

शमी के कोच बदरुद्दीन ने आगे बोला कि उसने एक महीने तक अभ्यास किया। उसके बाद हमने उसके लिए अंदर-19 ट्रायल लिया जहां उसने शानदार गेंदबाजी की।

अंतिम राउंड में वह बाहर हो गया और उसका चयन नहीं हो सका। शमी काफी दुखी हुए। इसके बाद हमने उनसे बोला कि आप यहां पहली बार आए हैं आप और आगे बढ़ेंगे और कड़ी मेहनत करेंगे।

बदरुद्दीन ने बताया कि, “इससे पहले वह गांव में ही क्रिकेट खेलते थे। उनके प्रोफेशनल करियर की शुरुआत सोनकपुर स्टेडियम से हुई।

बदरुद्दीन ने आगे बोला, “हर बार वह मुझसे पहले स्टेडियम में आते थे। जून की गर्मी में पसीने से लथपथ होने पर भी वह बोलते रहते थे।

कई बार तो हम परेशान हो जाते थे और बोलते थे कि यह तो पागल–मूर्ख है। उसमें बहुत जुनून था, इसी वजह से वह आज इतना आगे बढ़ पाए हैं। उन्होंने आगे कहा, यह वर्ल्ड कप है। इसमें सब कुछ देखना होगा।

शुरुआती दौर में जो संदेश दिए गए थे उसकी वजह से शमी को अवसर नहीं मिला, फिर जब हार्दिक पांड्या चोटिल हो गए तो यह हमारी टीम के लिए बहुत बुरा था। मेरा मानना है कि गेंदबाजों ने बहुत अच्छी गेंदबाजी की और बल्लेबाजों ने मैच जीत लिया।