रणजी ट्रॉफी : विदर्भ के खिलाफ जीत से मुंबई 42वीं बार चैंपियन
मुंबई ने आठ साल के बाद रणजी ट्रॉफी फाइनल के पांचवें और आखिरी दिन विदर्भ को 169 रन से हराया। इस तरह मेजबान ने 42वीं बार रणजी ट्रॉफी खिताब जीता।
टूर्नामेंट के इतिहास में 90 में से 48वीं बार मुंबई फाइनल में पहुंची थी। इस मैच का नतीजा उसी समय तय हो गया था जब विदर्भ को 538 रन का बड़ा लक्ष्य मिला था।

विदर्भ के कप्तान अक्षय वाडकर (102) और हर्ष दुबे (65) ने पूरे पहले सत्र में मुंबई के गेंदबाजों को परेशान किया। विदर्भ ने पांच विकेट पर 248 रन से आगे खेलना शुरू किया था लेकिन टीम 368 रन पर आल आउट हो गयी जबकि उसे जीत के लिए आज 290 रन और बनाने थे।
वाडकर ने इस साल पहला शतक जड़ने के साथ ही सत्र में 600 रन का आंकड़ा पार किया। दुबे ने प्रथम श्रेणी कैरियर में दूसरा अर्धशतक जमाया। ये साझेदारी 255 गेंद तक चली।
दूसरे सत्र का खेल शुरू होने के कुछ देर बाद ही वाडकर को तनुष कोटियान ने आउट किया। कोटियान ने 95 रन देकर चार विकेट लिये। यह साझेदारी टूटने के बाद विदर्भ की हार पर मुहर लग गई। विदर्भ दो बार खिताब जीतने के बाद तीन बार फाइनल हार गया है।
तुषार देशपांडे ने शॉर्ट गेंद पर दुबे को आउट किया। दुबे ने 128 गेंद में पांच चौकों और दो छक्कों से 65 रन बनाये। देशपांडे ने ही आदित्य सरवटे को भी पवेलियन भेजा। कोटियान ने यश ठाकुर (छह) के रूप में चौथा विकट लिया। अपने कैरियर का आखिरी मैच खेल रहे धवल कुलकर्णी ने उमेश यादव का विकेट लेकर विदर्भ की पारी का पटाक्षेप किया।