दुदिंस्का एथलेटिक्स टूर्नामेंट : यूपी के रामबाबू को रेस वॉक में कांस्य, साथ में हासिल की ये खास उपलब्धि
भारत के राम बाबू ने स्लोवाकिया के दुदिंस, में दुदिंस्का एथलेटिक्स टूर्नामेंट में पुरुषों की 20 किमी रेस वॉक स्पर्धा में कांस्य पदक जीता और इस प्रक्रिया में उन्होंने पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाइंग मानक को पूरा किया।
एशियन गेम्स-2023 में 35 किमी मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक विजेता सोनभद्र के बहुअरा गांव के भैरवा गांधी टोला के रामबाबू ने दुदिंस्का एथलेटिक्स टूर्नामेंट में इस इवेंट के लिए निर्धारित पेरिस ओलंपिक क्वालीफाइंग मानक 1:21:10 को पूरा करने के लिए एक घंटे और 20 मिनट (1:20:00) का समय लिया।

पेरू के सीजर ऑगस्टो रॉड्रिगेज ने 1:19:41 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, इक्वाडोर के ब्रायन डैनियल पिंटाडो ने 1:19:44 के समय के साथ रजत पदक हासिल किया।
बाबू ने दुदिंस्का 50 में नया व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड भी दर्ज किया। 20 किमी रेस वॉक कैटेगरी में उनका पिछला व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 1:21:04 था, जो उन्होंने इस साल जनवरी में चंडीगढ़ में 2024 दक्षिण एशियाई और भारतीय रेस वॉकिंग चैंपियनशिप में बनाया गया था।
एशियन गेम्स के कांस्य पदक विजेता राम बाबू पेरिस ओलंपिक क्वालीफाइंग मानक को तोड़ने वाले सातवें भारतीय रेस वॉकर हैं। इससे पहले अक्षदीप सिंह, विकास सिंह, परमजीत बिष्ट, सूरज पंवार, सर्विन सेबेस्टियन और अर्शप्रीत सिंह ने यह उपलब्धि हासिल की थी।
प्रत्येक नेशनल फेडरेशन पेरिस ओलंपिक में पुरुषों की 20 किमी रेस वॉक स्पर्धा के लिए अधिकतम तीन एथलीट ही भेज सकता है।
एंट्री स्टैंडर्ड हासिल करना ओलंपिक क्वालिफिकेशन प्रक्रिया का सिर्फ एक हिस्सा है। पेरिस ओलंपिक के लिए एनओसी टीम के लिए किसे चुना जाएगा, इस पर आखिरी निर्णय नेशनल ओलंपिक कमेटी (एनओसी) का होता है।
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) के मुताबिक, अंतिम चयन जून में किया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि एकनाथ तुरंबेकर के साथ अक्षदीप, अर्शप्रीत, विकास, परमजीत और सर्विन भी शुरू में दुदिंस्का 50 के लिए सूची में थे, उनमें से किसी ने भी रेस में हिस्सा नहीं लिया।
पुरुषों की 35 किमी रेस वॉक में 2:29:56 समय के साथ बाबू के नाम पर राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी दर्ज है, जिसे उन्होंने पिछले साल दुदिंस्का 50 में बनाया था। बता दें, उन्होंने हाल के ही महीनों में 35 किमी कैटेगरी से 20 किमी कैटेगरी में बदलाव किया है।
गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय खेल में 35 किमी पैदल चाल में स्वर्ण पदक उत्तर प्रदेश के रामबाबू ने एथलेटिक्स ट्रेनिंग का खर्चा उठाने के लिए वेटर का काम किया और कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान मनरेगा योजना के तहत अपने पिता के साथ सड़क निर्माण में मजूदरी भी की थी क्योंकि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।