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बीसीसीआई से अतिरिक्त बोनस नहीं लेंगे राहुल द्रविड़, पेश की मिसाल

क्रिकेट को जेंटलमैन गेम कहा जाता है। यह बात तो हर कोई जानता है, इस सोच को सच साबित करते हैं राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज जो पैसों को नहीं, स्पिरिट ऑफ गेम को अहमियत देते हैं।

साभार : गूगल

द्रविड़ ने कई बार निस्वार्थ शैली के लिए प्रशंसा बटोरी है। क्रिकेट की दुनिया में राहुल द्रविड़ की पहचान अपने खेल के दिनों से एक शानदार खिलाड़ी के साथ-साथ एक अच्छे इंसान के रूप में भी है।

अपनी निस्वार्थ शैली का ताजा उदाहरण पेश करते हुए द्रविड़ ने एक और मिसाल कायम की है। राहुल द्रविड़ के कार्यकाल के दौरान उनकी कोचिंग में टीम इंडिया ने तीन आईसीसी फाइनल खेला। दो बार ट्रॉफी से चुकने के बाद टीम इंडिया ने टी20 विश्व कप जीतकर अपने कोच को यादगार विदाई दी।

बीसीसीआई द्वारा टी20 विश्व कप जीतने वाली टीम इंडिया के लिए 125 करोड़ रुपये की राशि में से 5 करोड़ रुपये की विजेता टीम के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ को देने का ऐलान किया, द्रविड़ ने पुरस्कार राशि का आधा हिस्सा छोड़ने का फैसला किया है।

जानकारी के अनुसार, मुख्य कोच राहुल द्रविड़ को 5 करोड़ रुपये मिले थे। टीम के अन्य कोचों को 2.5 करोड़ रुपये दिए जाने थे। द्रविड़ ने फैसला किया है कि वह भी अन्य कोचों की ही तरह 2.5 करोड़ लेंगे। द्रविड़ ने अपने सहयोगी स्टाफ के बराबर बोनस लेने का फैसला किया।

फाइनल में दक्षिण अफ्रीका पर सात रन की जीत के साथ भारत द्वारा पुरुष टी20 विश्व कप जीतने के एक दिन बाद, बीसीसीआई सचिव जय शाह ने कहा कि टीम को 125 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा।

वितरण फार्मूले के अनुसार, मुख्य कोच द्रविड़ और टीम के सभी 15 सदस्यों को 5-5 करोड़ रुपए मिलने थे। बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर, फील्डिंग कोच टी. दिलीप और गेंदबाजी कोच पारस महाम्ब्रे सहित अन्य सहयोगी स्टाफ को 2.5-2.5 करोड़ रुपए मिलने थे। द्रविड़ ने अन्य सहयोगी स्टाफ को दिए जाने वाले इनाम के साथ अपने बोनस में 2.5 करोड़ रुपए लेने से मना किया।

बीसीसीआई सूत्र ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया, “राहुल अपने सहयोगी स्टाफ (गेंदबाजी कोच पारस महाम्ब्रे, फील्डिंग कोच टी.दिलीप और बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर) के बराबर ही बोनस राशि (2.5 करोड़ रुपए) चाहते थे। हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब द्रविड़ ने पुरस्कारों के समान वितरण के लिए रुख अपनाया है। 2018 में भारत की विजयी अंडर-19 विश्व कप टीम के मुख्य कोच के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान द्रविड़ ने ऐसा ही कुछ किया था।

उस समय द्रविड़ को 50 लाख रुपये मिलने थे, सहयोगी स्टाफ के अन्य सदस्यों को 20-20 लाख रुपये मिलने वाले थे। द्रविड़ ने इस तरह के विभाजन से इनकार कर दिया, जिससे बीसीसीआई को इस बोनस में थोड़ा बदलाव करना पड़ा और सभी को समान रूप से पुरस्कृत करने के लिए मजबूर होना पड़ा। बोर्ड ने नकद पुरस्कारों की संशोधित सूची जारी की, जिसमें द्रविड़ सहित सहयोगी स्टाफ के प्रत्येक सदस्य को 30 लाख रुपये दिए गए।