बैडमिंटन के बजाय टेनिस में कर सकती थी बेहतरीन प्रदर्शन : साइना नेहवाल
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल का मानना है कि , उन्होंने बैडमिंटन खेलने के बजाय टेनिस का रैकेट पकड़ा होता, बतौर खिलाड़ी और बेहतरीन प्रदर्शन कर सकती थीं। वो दुनिया में शीर्ष रैंकिंग वाली पहली भारतीय महिला शटलर बनीं और ओलंपिक पदक जीतने वाली देश की पहली महिला एथलीट भी बनीं।

राष्ट्रपति भवन में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, ‘‘कभी कभार मुझे लगता है कि मेरे माता पिता ने मुझे टेनिस में डाला होता तो अच्छा होता। उन्होंने कहा, ‘‘इसमें ज्यादा पैसा है और मुझे लगता है कि मैं ज्यादा ताकतवर थी। मैं टेनिस में बैडमिंटन से बेहतर कर सकती थी।
उन्होंने कईयों को बैडमिंटन में आने के लिए प्रेरित किया है, जब उन्होंने आठ साल की उम्र में खेलना शुरू किया था तो उनके लिए कोई आदर्श नहीं था।
लंदन ओलंपिक के कांस्य के अलावा साइना ने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य और रजत पदक जीते तथा राष्ट्रमंडल खेल में कई स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने कहा, ‘‘मैं हमेशा बच्चों को खेलों पर ध्यान लगाने के लिए कहती हूं।
चीन 60-70 पदक जीतता है और हमें तीन चार पदक मिलते हैं। इतने सारे डॉक्टर और इंजीनियर होते हैं और उनके नाम अखबारों में नहीं आते।
साइना ने कहा, ‘‘मैं लड़कियों से आगे आने के लिए कहूंगी कि वे फिट होना शुरू करें और खेलों में आयें। हम बच्चों के लिए मौजूद हैं, उनके लिए प्रेरणा के लिए दुनिया की नंबर एक, ओलंपिक विजेता और इतनी सारी पदक विजेता हैं। साइना ने कहा, ‘‘मुझे कड़ी मेहनत करना पसंद है, मैं इतनी प्रतिभाशाली खिलाड़ी नहीं थी। मुझे काफी मेहनत करनी पड़ती थी।
कोई प्रतिभाशाली खिलाड़ी कोई चीज 100 बार करता था तो मुझे इसे 1000 दफा करना पड़ता था। मुझे कड़ी मेहनत करना पसंद है। मेरे कोचों को मेरा कभी हार नहीं मानने वाला जज्बा पसंद है।