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परिवार व गांव के अधूरे सपने को पेरिस ओलंपिक में पूरा करेंगे ‘गाजीपुर के राजकुमार’

तीन हजार की आबादी वाले करमपुर गांव से हॉकी स्टिक थामकर सैकड़ों लड़कों ने ओलंपिक खेलने का सपना देखा, इसे पूरा करने का मौका केवल राजकुमार पाल को मिला है और ‘गाजीपुर के राजकुमार’ के नाम से फेमस मिडफील्डर की ख्वाहिश पेरिस में अच्छा प्रदर्शन करके हर एक अधूरे सपने को पूरा करने की है।

साभार : गूगल

वाराणसी से 40 किलोमीटर दूर गाजीपुर के गांव करमपुर के मेघबरन स्टेडियम पर हॉकी का ककहरा सीखने वाले बच्चों के प्रेरणास्रोत बन गए हैं राजकुमार। एक ऐसा गांव जहां से 400 से अधिक लड़कों को हॉकी से रोजगार तो मिला, भारत की नुमाइंदगी का मौका नहीं। इनमें राजकुमार के दोनों भाई जोखन और राजू भी शामिल हैं जो देश के लिये नहीं खेल पाये।

उन्होंने ओलंपिक के लिये रवाना होने से पहले इंटरव्यू में कहा ,‘‘ हम तीनों भाई हॉकी खेलते हैं। बीच वाले भाई भारतीय टीम के शिविर में रह चुके हैं और बड़े भाई राष्ट्रीय स्तर पर खेले हैं। दोनों भारत के लिये नहीं खेल सके और अब एक रेलवे से और एक सेना से खेलते हैं।

अभावों के बीच कोच तेज बहादुर सिंह की मदद से हॉकी के शौक को परवान चढाने वाले इस मिडफील्डर ने कहा,‘‘ मेरे गांव के मैदान से 400 से ज्यादा लड़कों को हॉकी से नौकरी मिल गई इस स्तर पर कोई नहीं खेला। मेरे गांव के लोगों की नजरें मुझ पर है और मैं अपने भाइयों और उन सभी के अधूरे सपने पूरे करने के लिये पेरिस में कोई कोर कसर नहीं छोडूंगा।

करमपुर के मेघबरन स्टेडियम से हॉकी के अपने सफर की शुरूआत करने वाले राजकुमार ने 2018 में बेल्जियम में पांच देशों के अंडर 23 टूर्नामेंट में खेला और 2020 में भारतीय टीम में डेब्यू किया। अब तक 53 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके राजकुमार के पिता कल्पनाथ का 2011 में एक सड़क हादसे में निधन हो गया था।

राजकुमार ने कहा ,‘‘ वह दो साल परिवार के लिये काफी कठिन थे और मुझे लगा था कि अब आगे नहीं खेल पाऊंगा, मेरे परिवार ने हार नहीं मानी। टोक्यो ओलंपिक में मेरा चयन नहीं हो सका था, उससे निराश हुए बिना मेहनत की तो अब पेरिस जा रहा हूं। जब पेरिस में मैदान पर उतरूंगा तो यह सब कुर्बानियां याद रखूंगा।

उन्होंने कहा ,‘‘ जब ओलंपिक टीम में चयन की खबर मिली थी तो अपना अतीत याद करके मेरे आंसू निकल गए और पिताजी को बहुत याद किया। घर पर फोन किया तो मम्मी भी रो पड़ी थी। मैं अपने अतीत को कभी नहीं भूलता और इससे प्रेरणा मिलती है।

राजकुमार ने कहा कि पहला ओलंपिक खेलने का दबाव वह महसूस नहीं कर रहे। उन्होंने कहा,‘‘ बड़ी टीमों के खिलाफ पहले भी खेला हूं तो उतना दबाव नहीं है। पहला ओलंपिक होने से थोड़ा नर्वस होता हूं तो पी आर श्रीजेश, कप्तान हरमनप्रीत सिंह, मनप्रीत सिंह जैसे सीनियर खिलाड़ियों से बात करता हूं। ये लोग काफी मदद करते हैं।

बीरेंद्र लाकड़ा और सरदार सिंह को आदर्श मानने वाले इस खिलाड़ी ने कहा ,‘‘हम खेल के हर विभाग में पूरी तैयारी के साथ जा रहे हैं। हर छोटी बारीकी पर काम किया है और प्रो लीग में जो गलतियां हुई है, उस पर सुधार के लिये काफी मेहनत की है।वीडियो देखकर अपनी गलतियों का पता लगाया है और कोचों, सीनियर खिलाड़ियों की मदद से उन पर काम किया है।

ओलंपिक खेलगांव में रहने को लेकर कितने रोमांचित हैं , यह पूछने पर उन्होंने कहा ,‘‘ हमारा फोकस सिर्फ अपने मैचों पर है। ओलंपिक खेलगांव में बड़े बड़े सितारे होंगे, उस चकाचौंध पर अभी ध्यान नहीं है। हमें बस पदक का रंग बदलना है और अपने गांव को ओलंपिक पदक विजेता का गांव बनाना है।