पेरिस ओलंपिक बैडमिंटन : पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन अंतिम 16 में
भारतीय बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन और पीवी सिंधु ने पेरिस ओलंपिक में अपने अपने मुकाबले में जीत के साथ एकल प्री क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।

सिंधु ने एस्तोनिया की क्रिस्टीन कूबा को में 21 . 5, 21 . 10 से हराया। सिंधु ने यह मैच 33 मिनट में जीता। लक्ष्य ने इंडोनेशिया के जोनाथन क्रिस्टी को हराया।
लक्ष्य ने जीत के बाद कहा ,‘‘ यह कठिन मैच था और मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूं। उन्होंने कहा ,‘‘ स्वर्ण पदक पर नजरें हैं। पिछले कुछ महीने से प्रदर्शन अच्छा रहा है।
लक्ष्य का सामना प्री क्वार्टर फाइनल में हमवतन एच एस प्रणय से हो सकता है जो आखिरी ग्रुप मैच में वियतनाम के ली डुक फाट से खेलेंगे। सिंधु चीन की ही बिंगजियाओ से खेल सकती है।
सिंधु ने टोक्यो ओलंपिक में उसे ही हराकर कांस्य पदक जीता था। लक्ष्य ने मौजूदा आल इंग्लैंड और एशियाई खेल विजेता के खिलाफ यह मुकाबला 50 मिनट में 21 . 18, 21 . 12 से जीता।
लक्ष्य ने इससे पहले क्रिस्टी को सिर्फ एक बार चार साल पहले बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप में हराया था। दोनों के बीच ओलंपिक मुकाबले से पहले हुए पांच में से चार मुकाबले क्रिस्टी ने जीते थे।
लक्ष्य ने बुधवार को इस मुकाबले में परिपक्वता दिखाते हुए जबर्दस्त आक्रामक प्रदर्शन किया। पहले गेम में क्रिस्टी ने 5 . 0 की बढत बनाई थी जो 8 . 2 की हो गई। लक्ष्य ने अपने विरोधी को गलतियां करने पर मजबूर किया और अंतर 7 . 8 कर दिया।
एक समय स्कोर 16 . 16 से बराबरी पर था जिसके बाद क्रिस्टी ने दो अंक हासिल किया, लक्ष्य ने वापसी करते हुए बराबरी की। पीछे से शानदार रिटर्न पर लक्ष्य ने बढत बनाई और गेम प्वाइंट भुलाकर पहला गेम जीत लिया।
दूसरे गेम में लक्ष्य ने जजमेंट की कुछ गलतियां की, दबाव नहीं बनने दिया। अपने शानदार पुश और स्मैश से उन्होंने क्रिस्टी को लगातार गलतियां करने पर विवश किया। क्रिस्टी ब्रेक तक पूरी तरह दबाव में आ चुके थे और वापसी नहीं कर पाये।
सिंधु ने जीत के बाद कहा ,‘‘ मैं बहुत खुश हूं। ग्रुप में शीर्ष पर रहना जरूरी था। अब सामना ही बिंगजियाओ से होगा। इस जीत से मेरा आत्मविश्वास बढेगा। अगले मुकाबले आसान नहीं होंगे लिहाजा मुझे शत प्रतिशत तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा ,‘‘ मैं मैच दर मैच रणनीति बना रही हूं। पदक जीतना है और मुझे खुशी होती है जब लोग कहते हैं कि आपसे हैट्रिक चाहिये। आपसे पदक चाहिये। साथ ही काफी जिम्मेदारी और दबाव भी आता है जिसे हावी नहीं होने देना है।
पहले मैच की ही तरह सिंधु को इस मुकाबले में ज्यादा पसीना नहीं बहाना पड़ा। विश्व रैंकिंग में 73वें स्थान पर काबिज एस्तोनिया की खिलाड़ी 13वीं रैंकिंग वाली भारतीय का सामना नहीं कर सकी। सिंधु ने पहला गेम 14 मिनट में जीता।
दूसरे गेम में कूबा ने चुनौती पेश की, सिंधु ने हर वार का माकूल जवाब दिया। कूबा ने 2 . 0 की बढत बनाई, सिंधु ने बराबरी कर ली। लंबी रेलियां चली और एक समय सिंधु को पूरा नेट कवर करके दौड़ना पड़ा और कूबा ने शटल उनकी पहुंच से बाहर फेंकी।
सिंधु ने अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल करके क्रॉसकोर्ट स्मैश से 15 . 6 से बढत बना ली और इसके बाद कूबा को वापसी का मौका नहीं दिया।