पेरिस ओलंपिक : पदकों से दूर, भारतीय मुक्केबाज रहे नाकाम
निकहत ज़रीन और लवलीना बोरगोहेन जैसे विश्व चैंपियन खिलाड़ियों के बावजूद भारतीय मुक्केबाज पेरिस ओलंपिक में उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाए।

विजेंदर सिंह के बीजिंग ओलंपिक 2008 में कांस्य पदक जीतने के बाद भारतीय मुक्केबाजों से ओलंपिक में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाने लगी थी।
एमसी मैरी कॉम ने लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। रियो ओलंपिक 2016 में भारतीय मुक्केबाज पदक नहीं जीत पाए, टोक्यो ओलंपिक में लवलीना कांस्य पदक हासिल करने में सफल रही थी। जरीन (50 किग्रा), लवलीना (75 किग्रा) और निशांत देव (71 किग्रा) सभी को पोडियम पर पहुंचने का मजबूत दावेदार माना जा रहा था।
निशांत पदक से वंचित हो गए। जरीन और लवलीना का सवाल है तो वह अपनी मजबूत प्रतिद्वंदियों के सामने संघर्ष करती हुई दिखी। अमित पंघाल (51 किग्रा) अपनी पिछली फॉर्म को दिखाने में नाकाम रहे।
लवलीना, पंघाल और निशांत को पदक सुरक्षित करने के लिए दो जीत की जरूरत थी। लवलीना और जरीन को मुश्किल ड्रॉ मिला था, वह दोनों मौजूदा विश्व चैंपियन हैं और उनसे इस तरह की चुनौतियों से पार पाने की उम्मीद की जा रही थी, इन दोनों मुक्केबाजों ने चीन की अपनी प्रतिद्वंदियों के सामने आसानी से घुटने टेक दिए।
जरीन को स्वर्ण पदक का दावेदार माना जा रहा था, वह दूसरे दौर में ही वू यू से हार गईं। लवलीना को चीन की अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी ली कियान से हार मिली। इन दोनों मुक्केबाजों के बीच खेले गए चार मुकाबलों में से तीन में चीन की खिलाड़ी ने जीत दर्ज की है।
पुरुष वर्ग में पंघाल जाम्बिया के पैट्रिक चिनेम्बा के खिलाफ अपने तेज और आक्रामक खेल का प्रदर्शन नहीं कर पाए। जांबिया का मुक्केबाज भी दूसरे दौर से आगे नहीं बढ़ पाया।
जैस्मीन लेम्बोरिया (57 किग्रा) पिछले ओलंपिक की रजत पदक विजेता नेस्टी पेटेसियो से हार गईं। प्रीति पवार (54 किग्रा) ने मौजूदा विश्व रजत पदक विजेता येनी मार्सेला एरियास को चुनौती दी, आखिर में अनुभव की कमी उनके आड़े आई और उन्हें हार मिली।