बर्थडे स्पेशल : लक्ष्य सेन को विरासत में मिली बैडमिंटन
युवा भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने अपनी तेज प्रगति से बैडमिंटन की दुनिया को चकित और स्तब्ध कर दिया है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जन्मे इस खिलाड़ी को बैडमिंटन विरासत में मिली है। उनके दादा को अल्मोड़ा में बैडमिंटन का भीष्म पितामह कहा जाता है, लक्ष्य के पिता डीके सेन नेशनल लेवल पर बैडमिंटन खेल चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर के कोच हैं।

ये कहना गलत नहीं होगा कि ये परिवार नई पीढ़ी को ये खेल विरासत में देता है, इस भारतीय स्टार का भाई चिराग सेन इंटरनेशनल लेवल पर बैडमिंटन में भारत का प्रतिनिधित्व कर चूका है। लक्ष्य का पेरिस ओलंपिक में मेडल जीतने का सपना पूरा नहीं हो पाया, इससे उनकी काबिलियत पर सवाल उठाना जायज़ नहीं, ये उनका पहला ओलंपिक था और उनका सफर लंबा है।
उन्होंने मेहनत और संघर्ष के बूते सफलता का स्वाद चखा। इस शटलर ने जूनियर स्तर पर धाक जमाने के बाद दिग्गज खिलाड़ियों की फेहरिस्त में शामिल हो गए।
कई बड़ी प्रतियोगिताओं में लक्ष्य ने वो कर दिखाया जो अपेक्षा से परे था। पदक जीते, देश का नाम ऊंचा किया और खुद को भारतीय पुरुष बैडमिंटन के चेहरे के रूप में स्थापित किया।
2021 में लक्ष्य ने सुर्खियां बटोरी, जब उन्होंने नियमित रूप से पोडियम पर जगह पाने के लिए उच्च रेटिंग वाले विरोधियों को हराना शुरू कर दिया। उन्हें बड़ी सफलता तब मिली, जब उन्होंने 2022 राष्ट्रमंडल खेल के पुरुष बैडमिंटन एकल में स्वर्ण पदक जीता।
उन्होंने एशियाई जूनियर चैंपियनशिप (2018) में स्वर्ण पदक, डच ओपन 2019 में बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर का खिताब जीता, राष्ट्रमंडल खेल 2022 में स्वर्ण पदक, थॉमस कप 2022 में स्वर्ण पदक तो ऑल इंग्लैंड ओपन 2022 में रजत पदक जीता।