जिंदगी और मौत से जुझ रहे हैं कोबरा के कमांडेंट विभोर सिंह और हवलदार सुरेन्द्र कुमार

यूक्रेन और चुनाव के चक्कर मे देश की रक्षा करने वाले इन बहादुरों की खबर दब गई

नई दिल्ली। CRPF के सहायक कमांडेंट बिभोर सिंह जो बिहार के कैमूर जिले के निवासी हैं। पिछले 25 फरवरी को गया जिले के चकरबंधा इलाके में नक्सलियों से लोहा लेते हुए गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। घायल होने के बाद इन्हें 24 घंटे बाद दिल्ली के AIIMS में भर्ती किया गया। लेकिन उससे पहले उन्हें और उनके साथी को गया मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया जहां इलाज की उचित / पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी जिसकी वजह से उनके जख्मी पैर में संक्रमण बढ़ गया और उनके दोनों पैर काटने पड़े। शरीर में  संक्रमण के लगातार बढ़ने से अब उनकी तबियत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है। 

   25/02/2022 गया जिले के चकरबंधा जंगलों के अंदर सीआरपीएफ के 205 वीं वाहिनी कोबरा कमांडो जो की एक विशिष्ट नक्सल विरोधी टुकड़ी है द्वारा नक्सलियों के विरुद्ध अभियान चलाया गया। इस अभियान की एक टीम जो जंगल के काफी भीतर तक पहुंच चुकी थी उसका नेतृत्व सहायक कमांडेंट बिभोर कुमार सिंह कर रहे थे। बिभोर एक बेहद प्रतिभाशाली और बहादुर युवा हैं जो प्रशिक्षित इंजीनियर होने के बावजूद केंद्रीय रिजर्व पुलिस में देश सेवा के लिए शामिल हुए। इनका चयन 2016  बैच में हुआ था।

 बिभोर द्वारा इससे पहले छत्तीसगढ़ के सुकमा जैसे दुर्दांत इलाके में 2वीं वाहिनी सीआरपीएफ में तीन साल सेवा दी जा चुकी है। दिनांक 25/02/2022 को चकरबंधा के पंचरुखिया क्षेत्र में चलाए गए अभियान के दौरान बिभोर की टीम के ऊपर अचानक भारी मात्रा में नक्सलियों द्वारा फायरिंग की गई तथा अन्य घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान बिभोर ने अपनी टीम का बहादुरी से नेतृत्व करते हुए जवाबी कार्यवाही में लगातार फायरिंग का जवाब फायरिंग से दिया तथा नक्सल दस्ते को बचाव के लिए पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

पूरे घटना क्रम के दौरान अपने जवानों का मनोबल ऊंचा रखने व स्ट्रेटेजिक तौर पर अपनी पोजिशन को साधते हुए बिभोर अपने साथी हवलदार रेडियो ऑपरेटर सुरेंद्र कुमार के साथ एक जगह से दूसरी जगह बदल रहे थे। इस स्थिति में नक्सल द्वारा घटनास्थल से निकलने हेतु एक आईईडी ब्लास्ट किया गया जिसकी चपेट में दुर्भाग्यवश सहायक कमांडेंट बिभोर कुमार सिंह और उनके साथी हवलदार रेडियो ऑपरेटर सुरेंद्र कुमार आ गये और बुरी तरह ज़ख्मी हो गए। इसके परिणाम स्वरूप बिभोर के एक पैर का एंकल के नीचे का हिस्सा उड़ गया व दूसरे पैर में गंभीर चोटें आई। एक हाथ की दो उंगलियां भी ब्लास्ट में उड़ गईं।

 हवलदार रेडियो ऑपरेटर के पूरे शरीर को आईडी के स्प्लिन्टर/छर्रे ने भेद दिया। दोनों कार्मिक दुर्घटना में बुरी तरह लहूलुहान हो गए। टुकड़ी में ब्लास्ट के कारण भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी। इसके उपरांत भी सहायक कमांडेंट बिभोर कुमार सिंह ने जो किया वह अप्रतिम शौर्य और अपने कर्तव्य के प्रति उनकी दक्षता को उजागर करने वाली वो कहानी है जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देती रहेगी। बिभोर ने बिना किसी घबराहट और चीखपुकार के अपनी टीम का नेतृत्व जारी रखा तथा अपने साथियों का मनोबल बढ़ाते हुए जंगल से बाहर निकलने का दुर्गम रास्ता बिना किसी और हमले या दुर्घटना के पूरा किया।

बावजूद अपने पैरों के ब्लास्ट में उड़ जाने पर भी बिभोर को उनके साथियों द्वारा ये कहते हुए सुना गया की मुझे कुछ नहीं हुआ है आप सब बाकी साथियों का ध्यान दो और सावधानी से चलते रहें। एक युवा अधिकारी द्वारा इस अद्वितीय बहादुरी का उदाहरण बेहद प्रेरक तो लगता है लेकिन इस घटना का दूसरा पहलू कि इतने खतरनाक आपरेशन की प्लानिंग में उच्च अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की दुर्घटना की सूरत में घायलों को निकालने संबंधी कोई इंतज़ाम समय रहते क्यों नहीं किया गया था!

 दुर्घटना के लगभग 3 घंटे बाद हेलीकाप्टर घायलों के रेस्क्यू के लिए प्रशासनिक चाल में रांची से उड़कर गया पहुंचा। घायलों को हेलीकाप्टर में बिठाने के उपरांत उन्हें 8.30 रात को मौसम और उड़ान संबंधी निर्देशों का हवाला दे उतार दिया गया। इसके बाद मजबूरन बिभोर व उनके साथी को गया मेडिकल कॉलेज में ले जाया गया जहां बेहतर सुविधाओं के अभाव में उन्हें रातभर रखा गया। अगले दिन सुबह 11 बजे एयर एम्बुलेंस द्वारा दोनों घायलों को एम्स ट्रॉमा सेंटर दिल्ली ले जाया गया। तब से उनका उपचार वहां जारी है। अब तक इलाज़ में देरी और लापरवाही के कारण बढ़ते संक्रमण के कारण बिभोर के दोनों पैरों को अम्प्यूट करना पड़ा(एक घुटने तक दूसरा एंकल तक) और एक हाथ की दो उंगलियां भी ब्लास्ट में खत्म हो चुकी हैं। लगभग ऐसी ही घटना व हेलीकाप्टर न उपलब्ध होने के कारण बचाव में की गई देरी के कारण पिछले वर्ष एक उपकमांडेन्ट रैंक के अधिकारी की छत्तीसगढ़ आईईडी ब्लास्ट में जान चली गयी थी जिसके बाद उनके परिवार ने कई सवाल उठाए।

इस घटना के संबंध में सहायक कमांडेंट विभोर के परिवार वालों ने सरकार में बैठे ज़िम्मेदार लोगों मुख्यतः माननीय प्रधानमंत्री व गृहमंत्री से अपील भी की है-

1. दुर्घटना के शिकार कार्मिकों सहायक कमांडेंट बिभोर व उनके साथी के परिवार से गृहमंत्री मुलाकात कर स्वयं बेहतर इलाज़ व हर संभव मदद का आश्वासन दे तथा इस मुश्किल समय में उनका उत्साहवर्धन करें।

2. दोनों कार्मिकों को अभूतपूर्व बहादुरी व दुश्मन की मौजूदगी में दिखाए गए पराक्रम के लिए सरकार “कीर्ति चक्र” द्वारा सम्मानित करे ताकि उनके शौर्य को पहचान मिल सके।

3. दोनों कार्मिकों को सेवा के दौरान हुई दुर्घटना के कारण किसी भी लाभ से वंचित न  रखा जाए।

4. किसी भी नक्सल विरोधी ऑपेरशन के दौरान हेलीकाप्टर/एयर एम्बुलेंस की सुविधा सुनिश्चित करने के उपरांत ही ऐसे अभियान चलाएं जाएं। सीआरपीएफ विश्व का सबसे बड़ा पैरामिलिट्री बल है और पूरे भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है अतः बल का अपना एयर विंग होना विशेष सहायक सिद्ध होगा। इस बारे में सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए।

5. इस दुर्घटना में परिचलनिक  कमियों व लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर त्वरित कार्यवाही हो ताकि बल के कार्मिकों का मनोबल व विश्वास कायम रहे।