Trending

UPPSC Protest Prayagraj: यूपीपीएससी अभ्यर्थी प्रयागराज में क्यों कर रहे हैं विरोध, क्या हैं उनकी मांगें, कब तक होगा निदान?

बीएस राय/ प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) द्वारा आरओ-एआरओ और पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा दो अलग-अलग तिथियों पर आयोजित करने के निर्णय की घोषणा के बाद प्रयागराज में छात्र इसका विरोध कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के खिलाफ सोमवार को प्रयागराज में अभ्यर्थियों ने यूपीपीएससी आयोग के सामने धरना दे रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्र यूपीपीएससी की एक ही दिन में परीक्षा आयोजित करने की पुरानी प्रथा को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को घोषणा के खिलाफ यूपीपीएससी मुख्यालय पर धरना दिया, जबकि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने उन्हें तितर-बितर करने की कोशिश की।

प्रयागराज में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ-एआरओ) तथा प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) प्रारंभिक परीक्षाएं एक ही दिन आयोजित की जाएं, ताकि संभावित भ्रम से बचा जा सके और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। आयोग द्वारा 5 नवंबर को अलग-अलग दिनों में अलग-अलग पालियों में उक्त परीक्षाएं आयोजित करने की घोषणा के बाद विरोध शुरू हो गया।

नोटिस के अनुसार, समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ-एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा 22 और 23 दिसंबर को तीन शिफ्टों में आयोजित की जाएगी, और प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) प्रारंभिक परीक्षा 7 और 8 दिसंबर को दो शिफ्टों में आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा कार्यक्रम ने छात्रों को नाराज कर दिया है और उम्मीदवारों ने बड़े पैमाने पर आलोचना की है, जो अब आयोग के विरोध में धरना और मोमबत्ती मार्च कर रहे हैं।

महिलाओं समेत अधिकांश प्रदर्शनकारियों ने रात खुले आसमान के नीचे बिताई, जबकि जो लोग घर चले गए थे, वे मंगलवार सुबह आयोग के गेट पर आंदोलन में शामिल होने के लिए लौट आए। प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राएं तख्तियां थामे नजर आए, जिन पर नारे लिखे थे, “हम पीछे नहीं हटेंगे, जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता, हम एकजुट रहेंगे” और “एक दिन, एक परीक्षा।” मंगलवार को आंदोलनकारी ढोल बजाते नजर आए और यूपीपीएससी के चेयरमैन संजय श्रीनेत का पुतला लेकर उनके खिलाफ नारे लगाते नजर आए।

सूत्रों के हवाले से बताया कि जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस कमिश्नर ने सोमवार देर रात छात्रों के चल रहे विरोध प्रदर्शन और उनकी मांगों पर चर्चा के लिए बैठक की, लेकिन अभी तक यह बैठक बेनतीजा रही। यूपीपीएससी सचिव अशोक कुमार ने कहा, “आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिला मुख्यालय के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सरकारी संस्थानों को ही परीक्षा केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पहले, यही छात्र सुरक्षा और पेपर लीक की चिंताओं के कारण निजी संस्थानों को परीक्षा केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने के खिलाफ थे।”

लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कुमार ने कहा, “कुल 576,000 उम्मीदवारों ने पीसीएस परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया है, जबकि सभी 75 जिलों में केवल 435,000 छात्रों के लिए केंद्र उपलब्ध हैं। इन परिस्थितियों में, दो दिनों में परीक्षा आयोजित करना अपरिहार्य है।”

इससे पहले प्रदर्शन की शुरुआत के दौरान छात्र सुबह से ही यूपीपीएससी पर एकत्र होने लगे और दोपहर तक हजारों की संख्या में महिलाएं यूपीपीएससी गेट नंबर 2 की ओर बढ़ गईं। हजारों छात्रों ने सोमवार को प्रयागराज में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) गेट नंबर 2 के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) प्रारंभिक और समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ/एआरओ) परीक्षाएं एक ही पाली में कराने की मांग की। उन्होंने तख्तियां पकड़ी और सामान्यीकरण के खिलाफ नारे लगाए। ये छात्र सुबह यूपीपीएससी में इकट्ठा होना शुरू हुए और दोपहर तक महिलाओं सहित हजारों लोग यूपीपीएससी गेट नंबर 2 की ओर बढ़ गए थे।

न तो बैरिकेडिंग और न ही वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन्हें शांत करने के प्रयासों का कोई नतीजा निकला। छात्रों की पुलिस के साथ ‘झगड़ा’ हुआ और प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और यूपीपीएससी गेट के बाहर इकट्ठा हो गए। जब कुछ छात्र आक्रामक हो गए और यूपीपीएससी में घुसने की कोशिश की तो पुलिस को ‘हल्का बल’ प्रयोग करना पड़ा। छात्र तितर-बितर हो गए लेकिन जल्द ही फिर से इकट्ठा हो गए। इस बीच, डीसीपी सिटी अभिषेक भारती ने छात्रों पर बल प्रयोग से इनकार किया और कहा कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे।

यूपीपीएससी के बाहर और आयोग की ओर जाने वाले मार्गों पर अर्धसैनिक बलों सहित भारी बल तैनात किए गए हैं, जहां स्थानीय लोगों सहित लगभग 8000 छात्र विरोध कर रहे हैं। छात्र “न बताएंगे न हटेंगे’ के पर्चे बांट रहे हैं और सरकार विरोधी नारे भी लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी हलचल है और सुबह से ही UPPS@_no normalization ट्रेंड कर रहा है। इस बीच, मीडिया से बात करते हुए, प्रतियोगिता छात्र संघर्ष समिति के सदस्य प्रशांत पांडे ने कहा कि यूपीपीएससी ने मनमाने बदलाव किए हैं और पुराने परीक्षा पैटर्न को बदलते हुए सामान्यीकरण लागू कर रहा है। छात्र मांग कर रहे हैं कि परीक्षाएं एक दिन/पाली में आयोजित की जाएं।

इससे पहले 5 नवंबर को यूपीपीएससी ने घोषणा की थी कि आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा 22 और 23 दिसंबर को तीन पालियों में आयोजित की जाएगी और पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 7 और 8 दिसंबर को दो पालियों में आयोजित की जाएगी।

इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए रविवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक ही तिथि पर परीक्षा की मांग करने वाले अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी उनकी “वैध मांग” के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। पार्टी द्वारा जारी एक बयान में यादव ने कहा कि भाजपा ने अभ्यर्थियों की भर्ती नहीं की बल्कि “छलाव” किया। “जब एक नकल पकड़ी जाती है, तो भाजपा दूसरी नकल शुरू कर देती है।” यादव ने दावा किया कि अभ्यर्थी दो पालियों में परीक्षा आयोजित करने की भाजपा की “साजिश” को समझ गए हैं।

यादव ने यह भी आरोप लगाया कि यह भाजपा की चाल है ताकि युवाओं को सरकारी नौकरी न मिले और वे बेरोजगार रहें, जिससे अंततः उन्हें सस्ते मजदूर के रूप में काम करना पड़े। कन्नौज के सांसद ने कहा, “इससे भाजपा के मुनाफाखोरों की तिजोरियाँ भरती रहेंगी और वे भाजपा को चंदा देते रहेंगे, जिसका दुरुपयोग चुनाव जीतने के लिए होता रहेगा।” उन्होंने दावा किया कि बेरोजगार युवा इस दुष्चक्र और भाजपा की मंशा को समझ चुके हैं। “इसलिए वे अब चुनाव में भाजपा को हराने का संकल्प ले रहे हैं।”