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Maharashtra Politics

 बीएस राय : राय महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एनडीए और इंडिया गठबंधन आमने-सामने हैं। राजनीतिक दलों के अलावा ठाकरे, पवार, शिंदे, चव्हाण और राणे जैसे राजनीतिक परिवार भी प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। इन परिवारों की महाराष्ट्र की राजनीति में गहरी जड़ें हैं और इनके बीच राजनीतिक मुकाबला पूरे चुनाव को दिलचस्प बना रहा है। ये दर्जन भर परिवार महाराष्ट्र की राजनीति को नियंत्रित करते हैं।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की जंग में भाजपा नीत एनडीए और कांग्रेस नीत अखिल भारतीय गठबंधन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस चुनावी जंग में राज्य के कुछ खास राजनीतिक परिवारों की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। महाराष्ट्र की राजनीति में कई बड़े परिवारों का लंबे समय से दबदबा रहा है और इस बार भी ये राजनीतिक परिवार चुनावी चर्चाओं के केंद्र में हैं।

ठाकरे परिवार

महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे परिवार का नाम सबसे ऊपर आता है। बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की और राज्य की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए उद्धव ठाकरे ने पार्टी की कमान संभाली, लेकिन पार्टी में दरार के कारण उन्हें शिवसेना से अलग होकर नई पार्टी बनानी पड़ी। इस बार चुनाव में ठाकरे परिवार की तीसरी पीढ़ी से आदित्य ठाकरे और राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे मैदान में हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे ठाकरे परिवार की राजनीतिक साख को बरकरार रख पाते हैं या नहीं।

पवार और राणे परिवार

एनसीपी की स्थापना करने वाले महाराष्ट्र के पवार परिवार में शरद पवार का नाम सबसे अहम है। शरद पवार की विरासत अब बेटी सुप्रिया सुले और भतीजे अजित पवार के बीच बंट गई है। अजित पवार फिलहाल उपमुख्यमंत्री हैं और चुनावी मैदान में मजबूती से खड़े हैं। वहीं, शरद पवार ने अपने पोते योगेंद्र और रोहित पवार को भी चुनाव में उतारा है, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। वहीं नारायण राणे का नाम कोंकण क्षेत्र में आक्रामक नेता के रूप में जाना जाता है। शिवसेना से राजनीतिक सफर शुरू करने के बाद वे कांग्रेस और अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इस बार उनके बेटे नितेश और नीलेश राणे अलग-अलग सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। राणे परिवार की कोंकण में मजबूत पकड़ है, लेकिन इस बार मुकाबला आसान नहीं होगा।

चव्हाण एवं मुंडे परिवार

चव्हाण परिवार ने भी कांग्रेस के जरिए महाराष्ट्र की राजनीति में प्रभाव डाला है। हालांकि, अब परिवार के सदस्य भाजपा में शामिल हो चुके हैं। अशोक चव्हाण की पत्नी अमिता चव्हाण इस बार चुनाव लड़ रही हैं। चव्हाण परिवार नांदेड़ जिले में अपना प्रभाव बरकरार रखता है, लेकिन भाजपा के साथ गठबंधन में होने के कारण चुनौतीपूर्ण स्थिति बन गई है। गोपीनाथ मुंडे की राजनीतिक विरासत उनके परिवार के हाथ में है, जिसमें उनकी बेटी पंकजा मुंडे और भतीजे धनंजय मुंडे शामिल हैं। हालांकि, इस बार पंकजा चुनाव नहीं लड़ रही हैं, लेकिन धनंजय मैदान में हैं। अगर वे इस बार हार जाते हैं तो मुंडे परिवार की राजनीति को बड़ा झटका लग सकता है।

भुजबल और शिंदे परिवार

छगन भुजबल ओबीसी राजनीति में एक प्रभावशाली नाम हैं, जिन्होंने एनसीपी में शामिल होकर नासिक क्षेत्र में अपना दबदबा कायम रखा है। इस बार उनके भतीजे समीर भुजबल निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खड़े हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है। वहीं एकनाथ शिंदे और सुशील कुमार शिंदे, दोनों ही शिंदे परिवार महाराष्ट्र की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। कभी शिवसेना में बड़ी भूमिका निभाने वाले एकनाथ शिंदे अब अपने बेटे श्रीकांत शिंदे को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के सुशील कुमार शिंदे का भी सोलापुर क्षेत्र में प्रभाव है।

खड़से, देशमुख परिवार

कई अन्य परिवार भी महाराष्ट्र के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। खडसे परिवार एनसीपी और बीजेपी, देशमुख परिवार लातूर और निलंगेकर परिवार निलंगा क्षेत्र में बंटा हुआ है। आगामी चुनाव में इन सभी परिवारों की अहम भूमिका होगी। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के साथ-साथ ये राजनीतिक परिवार भी अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ठाकरे, पवार, राणे, चव्हाण, मुंडे और भुजबल जैसे प्रमुख राजनीतिक परिवारों के सदस्यों के चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन पारिवारिक दावेदारों में से कौन अपना राजनीतिक वर्चस्व कायम रख पाएगा और कौन नई चुनौतियों के सामने टिक नहीं पाएगा।