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Delhi Air Pollution : दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति गंभीर, दिल्ली- एनसीआर में कोहरे के चलते ऑरेंज अलर्ट

बीएस राय: देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता (AQI) बेहद खराब स्थिति में पहुंच गई है। सोमवार को दिल्ली का औसत AQI 481 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। कई इलाकों में AQI 490 को भी पार कर गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। नोएडा का AQI 384 और गुरुग्राम का AQI 468 रहा, जो प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाता है।

यह खराब हवा दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रही है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए GRAP-4 लागू हवा की गुणवत्ता में गिरावट को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चौथे चरण को लागू कर दिया गया है। GRAP-4 उन परिस्थितियों में लागू किया जाता है, जब AQI ‘गंभीर’ स्तर (400 से ऊपर) पर पहुंच जाता है। इसके तहत प्रमुख कदम उठाए गए हैं।

सभी निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर पूरी तरह से रोक। निर्माण स्थलों से धूल को रोकने के लिए कड़ी निगरानी। आवश्यक सेवाओं के अलावा अन्य वाहनों की संख्या में कमी। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त बसें और मेट्रो सेवाएं। यह योजना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने तैयार की है। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्तर को कम करना और जनता को तत्काल राहत पहुंचाना है।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में घना कोहरा छाए रहने का अनुमान जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कोहरे के चलते दृश्यता घटकर 200 मीटर रहने का अनुमान है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात बाधित हो सकता है। इसके अलावा स्मॉग के चलते दिन में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है।

आईएमडी ने लोगों को वाहन चलाते समय सावधानी बरतने और हवाई व रेल यात्रा की स्थिति के बारे में पहले से जानकारी लेने की सलाह दी है।

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और सांस या दिल की बीमारी से पीड़ित लोग इससे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। डॉक्टरों ने लोगों को घर से बाहर निकलने से बचने, मास्क पहनने और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की यह स्थिति न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि इसे स्वास्थ्य आपातकाल के तौर पर भी देखा जा रहा है। सरकार और जनता को मिलकर इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण मिल सके।