दिल्ली एनसीआर वायु प्रदूषण : समय रहते नहीं उठाए गए कदम तो दिल्ली में जीना हो जाएगा मुश्किल

बीएस राय/ दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का संकट गहरा गया है और हर जगह स्मॉग की चादर छा गई है। दिल्ली का AQI 494 पर पहुंच गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है और प्रदूषण नियंत्रण उपायों में तेजी लाने की चेतावनी दी है।
दिल्ली-एनसीआर इस समय गंभीर प्रदूषण से जूझ रहा है। स्मॉग की एक मोटी परत ने क्षेत्र को घेर लिया है, जिससे दृश्यता प्रभावित हो रही है और निवासियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़े चिंताजनक हैं। सोमवार को दिल्ली का AQI 494 पर पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। यह स्थिति एक पर्यावरणीय संकट को दर्शाती है, जिस पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को लागू करने में देरी के लिए दिल्ली सरकार को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक AQI 300 से नीचे नहीं आ जाता, तब तक GRAP-4 नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। साथ ही, प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से बच्चों को बचाने के लिए दिल्ली-एनसीआर में स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया।
दिल्ली में BS-4 डीजल वाहनों और अन्य वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, अन्य एनसीआर राज्यों में प्रवर्तन की कमी प्रदूषण में कोई महत्वपूर्ण कमी नहीं ला पा रही है। नए निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है, हालांकि कुछ क्षेत्र इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। दिल्ली सरकार ने पराली जलाने को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया है। पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन एनसीआर के अन्य राज्यों में यह समस्या बनी हुई है।
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने संभावित समाधान के तौर पर कृत्रिम वर्षा का प्रस्ताव दिया है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी दिखती है। वाहनों की संख्या कम करने के लिए ऑड-ईवन योजना पर विचार किया जा रहा है, हालांकि इसके क्रियान्वयन पर निर्णय अभी लंबित है। एनसीआर के शहरों में AQI भी गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। गुरुग्राम: AQI 468, गाजियाबाद: AQI 430, नोएडा: AQI 419, बहादुरगढ़: AQI 452, भिवाड़ी: AQI 449। ये आंकड़े साफ तौर पर संकेत देते हैं कि प्रदूषण सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे एनसीआर को प्रभावित किया है।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता प्रदूषण एक बड़ा संकट है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह न केवल प्रशासनिक सख्ती की मांग करता है, बल्कि सभी नागरिकों की जिम्मेदारी भी है। प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय के साथ-साथ ठोस रणनीति भी जरूरी है। अगर समय रहते उपाय किए गए तो इस संकट पर काबू पाया जा सकता है, नहीं तो भविष्य और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।