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Jharkhand Politics: नई टीम बनाने की कवायद में हेमंत सोरेन, क्या कांग्रेस को लगेगा झटका, जानिए इसकी वजहें

बीएस राय: झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार नई टीम बनाने की तैयारी में है। पिछली सरकार के चार मंत्रियों की हार और गठबंधन में नई पार्टी की एंट्री ने समीकरण बदल दिए हैं। कांग्रेस के कोटे में कटौती और महिलाओं और युवाओं को ज्यादा जगह दिए जाने की संभावना है। क्षेत्रीय संतुलन भी प्राथमिकता होगी। दरअसल इस बार सरकार में बदलाव और नई ऊर्जा की उम्मीदें झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकती हैं।

झारखंड में विधानसभा चुनाव के बाद हेमंत सोरेन ने नई सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इस बार उनकी सरकार में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। पिछली सरकार के मुकाबले यह सरकार बदली-बदली नजर आएगी, जिसकी वजह मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करना और गठबंधन में नए दलों की एंट्री है।

बदलते समीकरण झारखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री समेत कुल 12 मंत्री हो सकते हैं। पिछली सरकार में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को 7, कांग्रेस को 4 और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को 1 मंत्री पद मिला था। लेकिन इस बार सीटों की संख्या में बदलाव और नए समीकरणों के चलते मंत्रिमंडल के कोटे में बदलाव की संभावना है।

पिछली बार चार विधायकों पर एक मंत्री पद का फॉर्मूला था। इस बार यह अनुपात पांच विधायकों पर एक मंत्री पद हो सकता है। कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं, जिससे उसके मंत्रियों की संख्या कम हो सकती है। झामुमो ने 34 सीटें जीती हैं, जिससे उसके कोटे में और मंत्री शामिल हो सकते हैं। राजद के चार विजयी उम्मीदवारों में नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना है।

हेमंत सोरेन सरकार के चार प्रमुख मंत्री (मिथिलेश ठाकुर, बैद्यनाथ राम, बेबी देवी और बन्ना गुप्ता) चुनाव हार गए हैं। इसके अलावा राजद कोटे के मंत्री सत्यानंद भोगता चुनाव नहीं लड़े। ऐसे में नए प्रतिनिधियों को मौका मिलने की उम्मीद है। पिछली सरकार में सिर्फ दो महिला मंत्री थीं, लेकिन इस बार आठ महिला विधायकों के चुने जाने से उनकी भागीदारी बढ़ सकती है। युवा चेहरों को भी प्रमुखता मिलने की संभावना है, जिससे मंत्रिमंडल में नई ऊर्जा का संचार होगा।

हेमंत सरकार में क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। कोल्हान से तीन, संथाल से तीन, पलामू से एक और दक्षिणी व उत्तरी छोटानागपुर से चार मंत्री बनाने की योजना है। पिछली बार झामुमो ने तीन आदिवासी, एक दलित, एक सवर्ण और एक ओबीसी को मंत्री बनाया था। कांग्रेस ने एक अल्पसंख्यक, एक आदिवासी, एक सवर्ण और एक ओबीसी को प्रतिनिधित्व दिया था।

कांग्रेस की डिप्टी सीएम पद की मांग को हेमंत सोरेन ने खारिज कर दिया है। इसके बदले कांग्रेस को डिप्टी स्पीकर का पद दिया जा सकता है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार किस पार्टी को महत्वपूर्ण विभाग (जैसे वित्त, स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण विकास) मिलते हैं।

हेमंत सोरेन सरकार के सामने न केवल गठबंधन के भीतर संतुलन बनाने की चुनौती है, बल्कि राज्य के विकास के लिए नई प्राथमिकताएं तय करने का दबाव भी है। महिलाओं और युवाओं को बढ़ावा देना, क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करना और आदिवासी और वंचित वर्गों का सशक्तिकरण उनकी सरकार की प्राथमिकता होगी।