Maharashtra Politics : क्या फिर चौंकाएगी बीजेपी, जब भी सीएम चुनने में 72 घंटे लगाए बदल गया चेहरा

बीएस राय : महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हैं। भाजपा के पिछले रिकॉर्ड के अनुसार, अगर 72 घंटे से अधिक समय लगता है तो कोई न कोई चौंकाने वाला चेहरा सामने आ सकता है। अन्य राज्यों में भी पार्टी ने प्रमुख दावेदारों को दरकिनार कर अप्रत्याशित नाम चुने। क्या
महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बहुमत का दावा कर सत्ता में आने के संकेत तो दे दिए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री का चेहरा अभी भी एक बड़ा सवाल है। महाराष्ट्र के सीएम पद को लेकर 72 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका है और ऐसे में बीजेपी की परंपरा को देखते हुए किसी सरप्राइज चेहरे की एंट्री की अटकलें तेज हो गई हैं।
बीजेपी की सरकार गठन की प्रक्रिया में मुख्यमंत्री का चयन अक्सर अप्रत्याशित फैसले के तौर पर सामने आता है। पार्टी ने 2014 से अब तक कई बार ऐसे चेहरों को चुना है, जो सीएम पद की रेस में स्पष्ट दावेदार नहीं थे।
ओडिशा: मोहन माझी का सरप्राइज चयन (2024)
ओडिशा में बीजेपी ने 2024 में सरकार बनाई, लेकिन मुख्यमंत्री का चयन 8 दिन बाद हुआ। पार्टी ने धर्मेंद्र प्रधान और मनमोहन संबल जैसे वरिष्ठ नेताओं की जगह आदिवासी नेता मोहन माझी को सीएम बनाकर सबको चौंका दिया।
राजस्थान: भजनलाल शर्मा की अप्रत्याशित एंट्री (2023)
राजस्थान में 2023 विधानसभा चुनाव के बाद 9 दिनों के मंथन के बाद बीजेपी ने पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया। वसुंधरा राजे और किरोड़ी लाल मीना जैसे दिग्गजों को दरकिनार कर पार्टी ने युवा और नए चेहरे को मौका दिया।
मध्य प्रदेश: मोहन यादव का चयन (2023)
मध्य प्रदेश में भी 2023 में भाजपा सत्ता में लौटी, लेकिन शिवराज सिंह चौहान जैसे दिग्गज नेता की जगह मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया। 8 दिन बाद लिया गया यह फैसला भाजपा की रणनीतिक सोच को दर्शाता है।
छत्तीसगढ़: विष्णुदेव साय की ताजपोशी (2023)
छत्तीसगढ़ में 2023 में भाजपा ने 7 दिन के अंदर ही मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर दी। पार्टी ने रमन सिंह और अरुण साव जैसे दावेदारों की जगह विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाकर एक बार फिर चौंका दिया।
महाराष्ट्र में 2014 की चौंकाने वाली कहानी
2014 में भाजपा महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। मुख्यमंत्री पद के लिए नितिन गडकरी, पंकजा मुंडे और विनोद तावड़े जैसे नाम चर्चा में थे, लेकिन 7 दिन बाद ही देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बना दिया गया। यह फैसला उस समय अप्रत्याशित था, क्योंकि फडणवीस अपेक्षाकृत युवा और कम लोकप्रिय नेता थे। भाजपा का सरप्राइज गेम महाराष्ट्र या 2014 तक सीमित नहीं था।
उत्तर प्रदेश (2017) में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाना, जब मनोज सिन्हा और केशव प्रसाद मौर्य जैसे नाम दावेदार थे। हिमाचल प्रदेश (2017) में जयराम ठाकुर का चयन, जब प्रेम कुमार धूमल और जेपी नड्डा जैसे नाम आगे थे। उत्तराखंड (2017): त्रिवेंद्र सिंह रावत की अप्रत्याशित ताजपोशी हो गई।
जहां फैसला जल्दी हुआ, वहां पुराने चेहरे थे
जहां भाजपा ने मुख्यमंत्री चुनने में 72 घंटे से भी कम समय लिया, वहां मौजूदा सीएम को फिर से मौका मिला। गुजरात (2022 में भूपेंद्र पटेल फिर से मुख्यमंत्री चुने गए जबकि हरियाणा (2019): मनोहर लाल खट्टर फिर से सीएम बनाए गए।
महाराष्ट्र में आगे की राह
महाराष्ट्र में भाजपा के कई संभावित दावेदार हैं, जिनमें देवेंद्र फडणवीस प्रमुख हैं। लेकिन पिछले रुझानों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि फडणवीस को दोबारा मौका मिलेगा। पार्टी किसी नए और चौंकाने वाले चेहरे को आगे लाकर राजनीतिक समीकरणों को संतुलित कर सकती है।
बीजेपी की यह रणनीति न केवल एक राजनीतिक पैंतरा है, बल्कि इससे पार्टी का आधार मजबूत होता है। अब देखना होगा कि बीजेपी महाराष्ट्र में किसे मुख्यमंत्री बनाती है और यह फैसला पार्टी के लिए कितना फायदेमंद साबित होता है।