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Congress Politics : प्रियंका गांधी की संसद में एंट्री से कांग्रेस की राजनीति में आएगा बदलाव?

बीएस राय: प्रियंका गांधी पांच साल बाद लोकसभा में पहुंची हैं और उनके शपथ ग्रहण से कांग्रेस और गठबंधन के नेताओं में उत्साह का माहौल है। प्रियंका के आने से संगठन और संसदीय राजनीति में बदलाव आने की उम्मीद है। उनके फ्लोर मैनेजमेंट, भाषण और गठबंधन में भूमिका मजबूत हो सकती है। आखिरकार, प्रियंका गांधी का लोकसभा में प्रवेश न सिर्फ उनके लिए बल्कि कांग्रेस और उसके गठबंधन सहयोगियों के लिए भी नई शुरुआत हो सकती है। उनके संसदीय कार्यकाल से पार्टी में नया जोश और ताकत आने की उम्मीद है।

राजनीति में आने के पांच साल बाद प्रियंका गांधी अब लोकसभा पहुंच गई हैं. उनके शपथ ग्रहण से कांग्रेस के भीतर ही नहीं बल्कि गठबंधन के नेताओं में भी उत्साह का माहौल है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रियंका की एंट्री को पार्टी में ऊर्जा और शक्ति का संचार बताया है, जबकि शिवसेना नेता संजय राउत ने उन्हें शेरनी की उपाधि दी है।

प्रियंका के संसद में आने से कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों में कई उम्मीदें और अपेक्षाएं जगी हैं। अब सवाल उठता है कि क्या प्रियंका के संसद में जाने से कांग्रेस के भीतर कुछ खास बदलाव आएगा? प्रियंका गांधी का राजनीतिक सफर प्रियंका गांधी ने 2019 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा, लेकिन उनकी पहचान संगठन से रही।

जब वह उत्तर प्रदेश में पार्टी प्रभारी थीं, लेकिन वहां पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। कांग्रेस के लिए यूपी में चुनावी जमीन जीतना अभी भी चुनौतीपूर्ण है और प्रियंका को अब वहां से हटाकर संगठन में महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। 2024 में प्रियंका गांधी ने केरल की वायनाड सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता।

यह सीट कांग्रेस के लिए इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि 2019 में राहुल गांधी ने यहां से जीत दर्ज की थी, लेकिन 2024 में रायबरेली से जीतने के बाद राहुल ने यह सीट प्रियंका को सौंप दी। अब प्रियंका गांधी के संसद में आने से सवाल उठ रहा है कि कांग्रेस के अंदर क्या बदलाव आएगा और उनकी भूमिका क्या होगी?

कांग्रेस की संसद में फ्लोर मैनेजमेंट की स्थिति पिछले कुछ सालों में कमजोर रही है। 2019 में जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए बिल पेश किया जा रहा था, तब राज्यसभा में कांग्रेस के व्हिप ने पाला बदल लिया था, जिससे पार्टी को भारी नुकसान हुआ था। प्रियंका के संसद में आने से कांग्रेस के फ्लोर मैनेजमेंट में सुधार की उम्मीद है। वह बड़े मुद्दों पर नई रणनीति अपनाकर सरकार को चुनौती दे सकती हैं।

2024 के चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर भारत में अच्छी सीटें जीतीं, लेकिन पार्टी के पास ऐसा कोई नेता नहीं था, जिसका भाषण पूरे हिंदी बेल्ट में प्रभावी हो। प्रियंका गांधी के संसद में आने से यह समस्या हल हो सकती है। प्रियंका गांधी का हिंदी में धाराप्रवाह और प्रभावी ढंग से बोलना पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। वह खासकर महिलाओं के मुद्दों पर जोर दे सकती हैं, जैसा कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने संकेत दिया है। उनके भाषण से कांग्रेस की छवि और मजबूत हो सकती है।

प्रियंका गांधी का संसद में प्रवेश कांग्रेस के गठबंधन प्रबंधन को भी मजबूत कर सकता है। सपा के अखिलेश यादव से उनके अच्छे संबंध हैं और कई बार पर्दे के पीछे से गठबंधन में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। अब संसद में उनकी मौजूदगी सहयोगी दलों के नेताओं को प्रियंका से सीधे संवाद करने का मौका देगी। इससे कांग्रेस के गठबंधन प्रबंधन को और मजबूती मिल सकती है।

कांग्रेस के भीतर प्रियंका की एंट्री का असर प्रियंका गांधी का संसद में प्रवेश कांग्रेस में कई अहम बदलाव ला सकता है। एक तरफ जहां संगठन के भीतर केसी वेणुगोपाल जैसी प्रमुख हस्तियों की जिम्मेदारी में बदलाव हो सकता है, वहीं पार्टी को फ्लोर मैनेजमेंट में भी नई दिशा-निर्देश मिल सकते हैं। प्रियंका की भूमिका में बदलाव ने अब उन्हें न सिर्फ कांग्रेस के भीतर बल्कि गठबंधन के भीतर भी अहम स्थान दिला दिया है।