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UP CM Yogi: सीएम योगी ने बांग्लादेश की घटना की तुलना अयोध्या-संभल से की, बाबर का भी जिक्र किया

बीएस राय: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और संभल हिंसा के मुद्दे पर कड़ा बयान दिया। अयोध्या में 500 साल पहले बाबर द्वारा की गई घटनाओं से इसकी तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि तीनों घटनाओं की प्रकृति और “डीएनए” एक ही है।

अयोध्या कुंभ की घटना का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने रामायण मेले के उद्घाटन समारोह में कहा, “याद कीजिए, 500 साल पहले अयोध्या कुंभ में बाबर के आदमी ने क्या किया था। आज बांग्लादेश और संभल में भी वही हो रहा है।” उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हो रही घटनाएं बताती हैं कि भारत में भी ऐसे ही तत्व सक्रिय हैं।

राम मंदिर और आस्था पर जोर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 500 साल के संघर्ष के बाद भगवान श्री राम अयोध्या में अपने मंदिर में विराजमान हुए हैं। यह आयोजन सिर्फ अयोध्या तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे विश्व में इसका जश्न मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “दुनिया की हर समस्या का समाधान अयोध्या है। जब तक हमारी आस्था बनी रहेगी, तब तक भारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता।”

उन्होंने कहा, “जो राम का नहीं, वह हमारे किसी काम का नहीं।” योगी आदित्यनाथ ने भारतीय संस्कृति में आस्था को भारत की स्थिरता और एकता का आधार बताया।

योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा, ”ये लोग लोहिया जी के नाम पर राजनीति तो करते हैं, लेकिन उनके आदर्शों पर नहीं चलते।” उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक भारत की आस्था भगवान राम, कृष्ण और शिव में रहेगी, तब तक भारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा, ”हमने भगवान श्री राम को अपना आदर्श माना है। अगर हम उनके उच्च आदर्शों से प्रेरणा ले सकें, तो हमारा जीवन सार्थक हो जाएगा।” उन्होंने समाज को भगवान राम के आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया।

सीएम योगी का यह बयान धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है, जिसमें बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति और संभल हिंसा का संदर्भ शामिल है। यह बयान न केवल वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाता है, बल्कि अयोध्या संघर्ष और भगवान राम के मंदिर निर्माण के महत्व को भी रेखांकित करता है।

एक तरफ उनकी टिप्पणियां आस्था और संस्कृति की रक्षा का संदेश देती हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक विरोधियों को कटघरे में खड़ा करती हैं। आगामी राजनीतिक चर्चाओं में इसे एक महत्वपूर्ण बयान के रूप में देखा जा सकता है।